सफदरगंज। लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा यात्रियों की सहायता और गश्त (पेट्रोलिंग) के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। हकीकत में, यात्रियों को समय पर मदद नहीं मिल पाती और अक्सर उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिसके बाद ही गश्ती वाहन के कर्मचारी पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में, यात्रियों को अक्सर अपने साधनों से ही काम चलाना पड़ता है। जिले से लखनऊ तक के लगभग 85 किलोमीटर के हाईवे पर गश्त के लिए एनएचएआई के पास केवल एक ही वाहन उपलब्ध है। इस एक वाहन को हाईवे के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में ही लगभग दो घंटे का समय लग जाता है।
किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में, हाईवे पर क्रेन की सुविधा भी आसानी से उपलब्ध नहीं होती। यात्रियों को निजी स्रोतों से क्रेन मंगवानी पड़ती है, जिसमें अतिरिक्त समय और धन खर्च होता है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब टोल प्लाजा के माध्यम से प्रतिदिन करोड़ों रुपये वसूले जा रहे हों।
हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने इस समस्या को और उजागर किया है। 31 दिसंबर की रात लगभग 11 बजे, कोटवा सड़क स्थित चंद्रभानु अस्पताल के पास एक डीसीएम, जो कानपुर मंडी से गाजर लेकर गोरखपुर जा रही थी, हाईवे पर पलट गई। रामसनेहीघाट पुलिस द्वारा एनएचएआई के कई कर्मचारियों को सूचित करने के बावजूद, कोई भी समय पर मदद के लिए नहीं पहुंचा। अंततः, एक निजी व्यवसायी की क्रेन की मदद से पलटी हुई डीसीएम को हटाया गया।
इसी प्रकार, 2 जनवरी की सुबह लगभग सात बजे, अयोध्या की ओर जा रही एक कार टोल प्लाजा के डिवाइडर से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस घटना की सूचना मिलने पर भी, हाईवे की ओर से कोई क्रेन मौके पर नहीं पहुंची। मजबूरन, यात्रियों को एक निजी क्रेन बुलाकर कार को टोल प्लाजा से हटवाना पड़ा। इस तरह की घटनाएं आए दिन हो रही हैं, जिससे हाईवे पर सफर करने वाले यात्री लगातार परेशान हो रहे हैं।