बाराबंकी। सरकार प्रसूताओं को मुफ्त एंबुलेंस मुहैया कराने के साथ ही तमाम प्रकार की सुविधाएं दे रही है लेकिन जिले के 13 सीएचसी ऐसे हैं जहां पर न तो अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं और न ही रेडियोलॉजिस्ट। ऐसे में यहां पर आने वाली प्रसव पीड़िताएं जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर जाने को मजबूर हैं जहां पर जांच के नाम पर इन्हें लूटा जा रहा है।। जिम्मेदार समस्या का कोई हल तो निकालते नहीं बल्कि शासन स्तर का मामला होने की बात कहकर हाथ खड़े कर देते हैं।
जिले में 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हैदरगढ़ और देवा को छोड़ दिया जाए तो किसी भी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। यही नहीं जहां मशीन हैं भी वहां पर रेडियोलॉजिस्ट के बजाए प्रशिक्षु से काम लिया जा रहा है। देवा, हैदरगढ़, फतेहपुर, रामनगर, रामसनेहीघाट और टिकैतनगर फर्स्ट रेफरल यूनिटों के रूप में संचालित की जा रही हैं।
इनमें देवा और हैदरगढ़ में ही यह सुविधा है जबकि यहां पर प्रसव पीड़ितों को सभी प्रकार की सुविधा मुफ्त मिलनी चाहिए पर इलाज की बात दूर उनकी जांच तक नहीं हो रही। बताया जाता है कि हर माह की 9 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत करीब तीन हजार से अधिक प्रसव पीड़िताएं उपचार और जांच के लिए आती हैं परन्तु इन सभी को जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है।
अस्पतालों में नहीं मिलती जांच की सुविधा
सीएचसी फतेहपुर में इलाज के लिए आई हसनपुर की रमादेवी ने बताया कि देखने के बाद डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच लिख दी। पता करने पर बताया गया कि यह सुविधा अस्पताल में नहीं है। बाहर से जांच कराने पर डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक ने 500 रुपये पहले जमा कर लिए तब जांच की।
घुंघटेर सीएचसी पर इलाज को आई टिकैतगंज की सोनी देवी ने बताया कि देखने के बाद डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराए जाने की सलाह दी। लेकिन अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं बाहर केंद्र पर 600 रुपये लेकर अल्ट्रासाउंड किया गया। जबकि फतेहपुर में थ्री पी मॉडल पर डायग्नोस्टिक सेंटर को लिया गया है। इसके बाद भी जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से यहां पर आने वाली प्रसूताओं को बाहर से जांच करानी पड़ रही है।
टिकैतनगर में नहीं है एक भी डायग्नोस्टिक सेंटर
जिले की एक मात्र नगर पंचायत टिकैतनगर हैं जहां पर एक भी डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं है। जबकि यह पंचायत आकांक्षात्मक ब्लॉक की श्रेणी में आता है। इसके बाद भी यहां पर डायग्नोस्टिक सेंटर न होने के कारण अस्पताल में आने वाली प्रसव पीड़िताओं को जांच के लिए जिला मुख्यालय आना पड़ रहा है। जबकि पूरेडलई और निंदूरा ब्लॉक को आकांक्षात्मक ब्लॉक में रखा गया है और यहां पर थ्री पी के आधार पर डायग्नोस्टिक सेंटर लेने की प्रक्रिया चल रही है।
जिले में 15 में से 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो रेडियोलॉजिस्ट हैं और न ही अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। शासन स्तर से जो निर्देश होंगे उसका पालन किया जाएगा। फतेहपुर में थ्री पी मॉडल के आधार पर डायग्नोस्टिक सेंटर लिए गए हैं। निंदूरा और पूरेडलई ब्लॉक में इसी आधार पर डायग्नोस्टिक सेंटर लेने की प्रक्रिया चल रही है।
डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ