बाराबंकी। सरकारी चावल को हजम करना राइस मिल मालिकों के लिए आसान नहीं होगा। शासन ने इस बार व्यवस्था में काफी बदलाव किया है। जिसके तहत अग्रिम लॉट देने वाली मिल को ही कुटाई के लिए सरकारी धान दिया जा रहा है। यही वजह है कि अब तक करीब 99 प्रतिशत सरकारी चावल एफसीआई गोदाम पहुंच चुका है।
सरकारी चावल को हजम कर जाना राइस मिलर्स के बाएं हाथ का खेल होता था। फतेहपुर स्थित रवि एडिबल ने पिछले साल करीब दो करोड़ 61 लाख रुपये का सरकारी चावल हजम करने का पूरा प्लान तैयार किया। लेकिन जब इस बात की जानकारी उच्चाधिकारियों को हुई तो उन्होंने इनकी संपत्ति कुर्क कर उसकी नीलामी तक करा दी। अभी भी मिल मालिक पर 78 लाख की देनदारी है।
इससे सबक लेते हुए खाद्य एवं रसद विभाग ने इस बार ऐसी योजना लागू कि है जिसका अनुपालन सभी राइस मिल मालिकों को करना पड़ रहा है। एक लॉट चावल (290 क्विंटल) अग्रिम देने पर ही सरकारी धान (432 क्विंटल) कुटाई के लिए दिया जा रहा है। यह प्रयोग इतना सफल रहा है कि अब तक राइस मिल मालिकों को एक लाख 23 हजार 282 एमटी धान की कुटाई के लिए दिया गया। इसके सापेक्ष राइस मिलर्स 82 हजार 420 एमटी चावल एफसीआई गोदाम को दे चुके हैं।
शासनादेश के अनुसार इस बार अग्रिम एक लॉट देने वाली मिल को ही सरकारी धान कुटाई के लिए दिया जा रहा है। यही वजह है कि अब तक 99 प्रतिशत सरकारी चावल एफसीआई गोदाम को पहुंच चुका है। इस बार सरकारी चावल का एक भी दाना इधर से उधर नहीं हो पाएगा।
रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी