बाराबंकी। नगर पालिका परिषद नवाबगंज क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बना कूड़ा निस्तारण केंद्र छह महीने से बंद पड़ा है। ऐसेे में शहर से निकलने वाले कूड़े का समय से निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कूड़ा निस्तारण केंद्र को पुन: शुरू करानेे की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए तकनीकी टीम ने यहां लगी मशीनों का मुआयना किया और तीन ट्रॉमेल मशीनें ठीक करानेे के लिए 54 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। माना जा रहा है कि जल्द ही कूड़ा निस्तारण केंद्र पर कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
शहर से प्रतिदिन करीब 30 से 35 टन कूड़ा निकलता है। इस कूड़े के निस्तारण के लिए ककरहिया में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रोसेसिंंग प्लांट का निर्माण कराया गया था, लेकिन करीब छह माह से यह प्लांट बंद पड़ा है। ऐसे में यहां कूूूड़े का पहाड़ लग गया है। कूड़े को अलग-अलग करने व प्रबंधन करने के लिए लगी मशीनें भी खराब हो चुकी हैं। पूर्व में कूड़ा निस्तारण केंद्र का संचालन करने वाली कंपनी भी अपने हाथ खड़े कर चुकी है।
इसे देखते हुए नगर पालिका ने स्वयं ही इसके संचालन का जिम्मा उठाया है। पुन: कूड़ा निस्तारण प्लांट चलाने के लिए यहां लगी मशीनों का सर्वे कराया गया है। वर्तमान में यहां लगे सभी छह ट्रॉमेल मशीनें खराब हो चुकी हैं। इनमें से तीन मशीनों को शुरू कराने के लिए करीब 54 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार हुआ है। ईओ पवन कुमार ने बताया कि प्रस्ताव को समिति से मंजूरी मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।
ऐसे काम करती हैं ट्रॉमेल मशीनें
ट्रॉमेल तीन मशीनों का एक सेट होता है। दो मशीनों में 30 एमएम और तीसरी मशीन में छह एमएम की छलनी होती है। कूड़े को पहले दो मशीनों में डाला जाता है। इनसे 30-30 एमएम से अधिक आकार वाला कूड़ा अलग हो जाता है। इसमें कुछ पत्थर और कुछ ज्वलनशील पदार्थ जैसे रबर व प्लास्टिक आदि होते हैं। ब्लोअर के जरिये ज्वलनशील पदार्थ को अलग कर लिया जाता है। इसका इस्तेमाल बिजली बनाने के संयंत्र किया जाता है। 30 एमएम से कम आकार वाले कूड़े को तीसरी मशीन में डाला जाता है। छह एमएम की छलनी से निकलने वाला कूड़ा मिट्टी होता है। इससे अधिक आकार वाले कूड़े का इस्तेमाल रोड़ी, बदरपुर और टाइल्स बनाने में किया जाता है।