देवा महोत्सव के ऑडिटोरियम में शुक्रवार की रात आयोजित आल इंडिया मुशायरा में श्रोताओं से खचाखच भरा ऑडिटोरियम कार्यक्रम की सफलता का गवाह बना। वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, पाकिर अदीब जैसे नामी गिरामी शायरों के जमावड़े ने मुशायरे को यादगार बना दिया। श्रोताओं की नब्ज भांप शायरों ने ऐसी झड़ी लगाई कि ऑडिटोरियम में लोग मंत्रमुग्ध हो गए और इरशाद-इरशाद, वाह-वाह के साथ तालियों की गडग़ड़ाहट से ऑडिटोरियम गूंजता रहा। श्रोताओं से खचाखच भरे परिसर में शायरों ने ऐसा समां बांधा कि लोग टस से मस न हुए।
महोत्सव के ऑडिटोरियम में शुक्रवार की रात मुशायरे के नाम रही। नामचीन शायर अपने अशआर अनूठे अंदाज से अल्फाजों में पिरोते रहे और मंत्रमुग्ध हुए श्रोताओं की तालियों से ऑडिटोरियम गूंजता रहा। खास अंदाज मेें राहत इंदौरी ने सुनाया- झूठ ने झूठ से कहा सच बोलो, सरकारी ऐलान हुआ है सच बोलो, घर के अंदर झूठों की एक मंडी है, दरवाजे पर लिखा है सच बोलो.. तो पंडाल में फिर तालियां गूंज उठी।
उर्दू के बड़े शायर वसीम बरेलवी ने पढ़ा- जहां रहेगा वहीं रोशनी लुटाएगा, किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता.., आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता है, भूल जाता है जमीं से ही नजर आता है.. सुनाकर कार्यक्रम को बुलंदी पर पहुंचा दिया। मैकश अमरोहवी ने सुनाया- मेरी निगाह बदन पर ठहर गई वरना वह अपनी रुह मेरे नाम करने वाला था। सिराज मोहम्मद सिराज ने फरमाया- जहां पर बैठे हैं अबर गाने शहरे तलब कि राज हम भी वहीं सर झुकाए बैठे हैं..। भोपाल से आए डॉ. मुबारक खान शाहीन ने सुनाया- ओ आफताब स्वाओ में बह गया शाहीन, जमीं पर जिसके कई महताब रोशन.. सुनाया तो तालियां गूंज उठी। नईम अख्तर खादमी बुरहानपुर ने- वह अपने को बड़ा गिनने लगा है अभी, जो भी खुद गिनती में नहीं है.. सुनाया तो ऑडिटोरियम में इरशाद-इरशाद, वाह-वाह के स्वर गूंज उठे। उस्मान मिनाई ने सुनाया- वतन के लोग गर एक साथ हो जाएं, तो फिर ये अहले सियासत अनाथ हो जाए।
जौहर कानपुरी ने- काम अच्छे हम न कर पाए तो बद करने लगे, दूसरों की कामयाबी से हसद करने लगे, बुझ गए अपने दीये तो दूसरों के भी बुझे, इस इरादे से हवाओं की मदद करने लगे.. सुनाकर वाहवाही लूटी। उमर फारुकी ने सुनाया- जिन्होंने जीते जी सच्चाई का दामन नहीं छोड़, खुदा ने उनके हिस्से में सदा सम्मान लिखा है, उन्हीं लोगों पर हिंदुस्तान की तारीख है रोशन जिन्होंने सरहद पर खूं से हिंदुस्तान लिखा है.. पर खूब तालियां बजी। शरद नानपारी ने सुनाया- लोग सूरज बदलते रहे हम अंधेरों में चलते रहे, अमन की बात होती रही घर परिंदों के जलते रहे..। शरीम ताबिज ने सुनाया- उससे पूछो वो बताएगा मकां की कीमत, उसको फुटपाथ के आगोश ने पाला है..। कई शायरों ने कलाम पेश कर समां बांध दिया। सांस्कृतिक पंडाल में देररात तक नामचीन शायरों के कलाम गूंजते रहे। मुशायरे की निजामत पाकिर अदीब व शदारत इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के जस्टिस सबीबुल हसनैन ने की। इस मौके पर पूर्व डीजीपी रिजवान अहमद, गयासुद्दीन किदवाई, विधायक सुरेश यादव, सदानंद गुप्ता, सुशील वर्मा, देवानंद श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।