बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के साथ माताओं के रहने के लिए 18 बेड का मदर सिक न्यू चाइल्ड यूनिट (एमएसएनसीयू) बनकर तैयार हो गया है। नवजातों के गहन इलाज के लिए प्रदेश में गाजियाबाद के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा वार्ड होगा। 27 अगस्त को शुभारंभ के बाद इसका संचालन शुरू हो जाएगा। इससे पैदा होने के समय कम वजन वाले बच्चों के इलाज में काफी मदद मिलेगी।
जिला महिला अस्पताल में ऐसे नवजातों के लिए संचालित 12 बेड के एसएनसीयू वार्ड को ही विस्तारित कर 18 बेड का बनाकर, इसे मदर सिक न्यू चाइल्ड यूनिट (एमएसएनसीयू) वार्ड के तब्दील किया गया है। इस वार्ड में पहली बार नवजात के साथ माताएं भी रह सकेंगी। इससे उनके इलाज से लेकर देखभाल करने आसानी होगी। इस वार्ड को संसाधनयुक्त बनाने के लिए पहले 25 लाख का बजट प्रस्ताव बनाया गया था। स्वीकृति न मिलने के कारण मामला बीच में अटक गया था।
इसके बाद बच्चों के स्वास्थ्य पर काम करने वाली सीईएल कंपनी के आइसीएमआर फंड से इस वार्ड के सिविल वर्क व नर्सिंग काउंटर और अस्पताल के बजट से बिजली, शौचालय का निर्माण कराकर आधुनिक सुविधाओं से लैस 18 बेड के गहन चिकित्सा इकाई वार्ड को तैयार कराया गया। सीएमएस डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि महिला अस्पताल में एक अलग एमएसएनसीयू वार्ड तैयार किया गया है। इसमें माता भी नवजात की देखभाल के लिए रह सकेंगी। 27 अगस्त को इस वार्ड का शुभारंभ कर क्रियाशील किया जाएगा। (संवाद)
समय-समय पर करा सकेंगी स्तनपान
एसएनसीयू में भर्ती गंभीर नवजात शिशुओं को जन्म के बाद रखा जाता है। इसमें माताओं के साथ न रहने के कारण उनके स्तनपान कराने से लेकर देखभाल तक में काफी दिक्कत उठाना पड़ती है। इस परेशानी से राहत दिलाने के लिए नए वार्ड में अब माता भी नवजात के साथ रह सकेंगी।