केंद्र सरकार की टीम शुक्रवार को जिले में आलू की फसल की मैपिंग का प्रशिक्षण देने व फील्ड विजिट के लिए विकासखंड के दफेदार पुरवा पहुंची।
टीम के डीपीटीएस के निदेशक के साथ 28 जिले के जिला उद्यान अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम द्वारा जिले में 10 स्थानों पर आलू की खेती की मैपिंग कर सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने की तैयारियों के बारे में बताया।
कृषि मंत्रालय कृषि विभाग, सहकारिता एवं किसान कल्याण का उपक्रम महालनबीस नेशनल क्राफ फॉर कॉस्टिंग सेंटर के कंसलटेंट डॉ धीरज कुमार ने 28 जिले के जिला उद्यान अधिकारियों के साथ फील्ड विजिट की। जिसमें आलू की फसल की 10 स्थानों से मैपिंग करके फसल के सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने का प्रशिक्षण दिया।
जिला उद्यान अधिकारी जयकरण सिंह टीम के साथ देवा के दफेदार पुरवा पहुंचे और मैपिंग का पहला चरण पूरा किया। फसल परियोजना राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तर पर फसलों के कई पूर्व फसल उत्पादन का अनुमान लगाया है। फसल क्षेत्र की गणना उसकी स्थिति के आंकलन व उत्पादन की भविष्यवाणी की कोर रिमोट सेंसिंग डाटा दोनों ऑप्टिकल और माइक्रोवेव के रूप में फसल की उपज का अनुमान लगाया है।
जिसमें वर्णक्रम उपज मॉडल, फसल विकास सिमुलेशन मॉडल फसल दृष्टिकोण बुआई के संचालन से पहले उत्पादन की भविष्यवाणी करने अर्थमितीय मॉडल का उपयोग शामिल है।
परियोजना के तहत राष्ट्रीय, राज्य के पूर्वानुमान सक्रिय करने के लिए जोर दिया जा रहा है। यह परियोजना खरीफ, रबी, शीतकालीन आलू, का राज्य व जिला स्तर का अनुमान लगाया है। सॉफ्टवेयर पर मैपिंग की अपलोडिंग कर सेटेलाइट से आलू के उत्पादन व रोग ग्रसित क्षेत्रों पर नजर रखी जा सकेगी। यह सेटेलाइट सप्ताह में एक बार घूमकर फसल के उत्पादन व रोग का पूर्वानुमान लगाकर भविष्यवाणी करेगा।