बाराबंकी। जिला मुख्यालय से लेकर कस्बों और गांवों में अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों और झोलाछाप पर स्वास्थ्य विभाग के कार्रवाई के दावे सवालों के घेरे में आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल से लेकर अब तक 71 अस्पतालों को सील करने का बयान जारी किया है। जब जारी सूची में शामिल कई अस्पतालों की पड़ताल की गई, तो वे खुलेआम संचालित पाए गए। वहां इलाज करा रहे मरीजों ने बताया कि ये अस्पताल लंबे समय से चल रहे हैं, जिससे साफ होता है कि विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित है और सील किए गए अधिकांश अवैध अस्पताल पूरी तरह से संचालित हो रहे हैं।
जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या लगभग 276 है, जबकि अवैध अस्पतालों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है। जिले में निजी अस्पतालों में गलत इलाज से आए दिन हो रही मौतों के बाद जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। रामनगर के कटियारा में एक अस्पताल में गलत इलाज से एक प्रसूता की मौत हो गई थी। इससे पहले फतेहपुर और बदोसराय के निजी अस्पतालों में भी इलाज के दौरान प्रसूताओं और युवकों की मौत हो चुकी है। कुछ दिन पहले विशुनपुर कस्बे में भी गलत इलाज से एक प्रसूता की जान गई थी।
डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की एक सूची जारी करते हुए दावा किया कि अप्रैल से अब तक 71 अस्पतालों, क्लीनिक और नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि, शुक्रवार को जारी इस सूची की पड़ताल में सूरतगंज, टिकैतगंज, सिद्धौर, बाबागंज समेत कई स्थानों पर अवैध अस्पतालों का संचालन होता पाया गया। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
वर्जन
अब तक जिन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है उन्हीं की सूची डाली गई है। यदि इसके बाद भी कोई अस्पताल संचालित हो रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एलबी गुप्ता, नोडल अधिकारी एसीएमओ चिकित्सा एवं पंजीयन