बाराबंकी। मनरेगा योजना धीरे-धीरे उपेक्षित होती जा रही है। पिछले चार माह से योजना के तहत एक भी पैसा नहीं मिला है। जिसकी वजह से मजदूरी और सामग्री का करीब 140 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। श्रमिकों को मजदूरी न मिलने की वजह से जहां वह गांव में कार्य करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, वहीं सामग्री का पैसा न मिलने की वजह से विकास कार्य भी लगभग बाधित हो चुके हैं।
जिले में मनरेगा मजदूरों की संख्या चार लाख 78,601 है। इनमें से एक लाख 64,767 को काम मिला। लेकिन इन मजदूरों को पिछले चार माह से मजदूरी नहीं मिली है। मजदूरी का करीब 70 करोड़ रुपया और सामग्री का भी 70 करोड़ रुपया बकाया है। विभाग का कहना है दिसंबर माह के पहले सप्ताह में कुछ पैसा आया था, इसके बाद से योजना के मद में अभी तक कोई पैसा नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार योजना में बड़े पैमाने पर हुई धांधली को देखते हुए इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
इससे सबसे ज्यादा दिक्कतें दैनिक मजदूरों को होने लगी है। उन्हें अब गांव में काम नहीं मिलता है, इसके लिए उन्हें शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। वहीं, सामग्री मद में भुगतान न होने के कारण जिम्मेदार भी गांवों में विकास कार्य कराने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
गांव छोड़ शहरों की ओर बढ़ा रुझान
मनरेगा में कार्य करने वाले श्रमिक रामदास बताते हैं कि पहले गांव में ही काम मिल जाया करता था, लेकिन अब पैसा न होने की वजह से गांव में काम नहीं मिलता। इसलिए अब शहर जाना पड़ता है। बजरंग बताते हैं कि पहले गांव में काम मिलने की गारंटी होती थी लेकिन अब काम मिलेगा या नहीं, इसका कोई भरोसा नहीं रहता। ऐसे में परिवार चलाने के लिए शहर जाना मजबूरी हो गई है।
उच्चाधिकारियों को कराया गया अवगत
मनरेगा योजना में पिछले चार माह से पैसा नहीं है, जिसकी वजह से मजदूरी और सामग्री का करीब 140 करोड़ रुपया बकाया है। इससे उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही पैसा आने की उम्मीद है। हालांकि शासन स्तर से मनरेगा मजदूरी में 15 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
- बृजेश कुमार, उपायुक्त मनरेगा