बाराबंकी। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में सोमवार को जिलाध्यक्ष सुनील कुमार के नेतृत्व में शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम के प्रतिनिधि राजीव वर्मा कोे सौपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम में स्पष्ट रूप से शिक्षकों की दो श्रेणियां हैं। 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा गया है। इसके बाद नियुक्ति प्राप्त करने के लिए अथवा नियुक्ति प्राप्त कर चुके शिक्षकों के लिए टीईटी अर्हता के रूप में अनिवार्य है। कोर्ट के निर्णय में इस तथ्य की अनदेखी की गई। जिससे देश के 20 लाख से अधिक शिक्षक चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।
महासंघ के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि ज्ञापन में नियमों के अंतर्गत नियुक्त अनुभवी शिक्षकों की सेवा, सुरक्षा एवं गरिमा सुनिश्चित करने तथा लाखों शिक्षकों को सेवा समाप्ति से बचाने के लिए आवश्यक नीतिगत अथवा विधायी कदम उठाए जाने की मांग की गई है। महासंघ के महामंत्री संतोष वर्मा ने बताया कि प्रश्न टीईटी उत्तीर्ण करने का नहीं है। प्रश्न गलत परंपराओं के स्थापित होने तथा शिक्षकों के मान सम्मान और स्वाभिमान का है। इस मौके पर विजय प्रताप सिंह, डॉ नरेंद्र प्रकाश मिश्र, सौरभ दीक्षित, विवेक मौजूद रहे।