वाणिज्य कर विभाग की छापेमारी और उत्पीड़न के विरोध में व्यापारियों ने मंगलवार को दुकानें बंद कर विरोध जताया। दिनभर दुकानें बंद रहने से करीब ढाई करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। शहर की लगभग 80 फीसदी दुकानें बंद रहीं। दोपहर बाद एडीएम ने व्यापारियों व वाणिज्य कर अधिकारियों के साथ बात कर हड़ताल समाप्त करवाई।
वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों द्वारा व्यापारियों के प्रतिष्ठान व गोदाम पर आए दिन की जा रही छापेमारी के विरोध में मंगलवार को व्यापारियों ने जिला बंद का एलान किया था। जुलूस के रूप में व्यापारियों ने पूरे शहर का भ्रमण करते हुए वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया।
बंद से जिले के व्यापार मंडल गुटों में व्याप्त गुटबाजी भी सामने आ गई। शहर के मुख्य बाजार धनोखर, घंटाघर, नाका सतरिख, छाया चौराहा, निबलेट चौराहा, हाईवे, लखपेड़ाबाग, पल्हरी चौराहा, आवास विकास, रेलवे स्टेशन आदि जगहोें पर दुकानें बंद दिखी। इस दौरान अधिकतर बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। दवा व्यापार संगठन के व्यापारी बंद में शामिल नहीं हुए। शहर के सभी मेडिकल स्टोर खुले रहे।
आदर्श व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता बब्बी ने बताया कि बंद मेें सभी व्यापारी शामिल हुए। ज्यादातर दुकानें बंद रही। इस बंद से करीब ढाई करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। शहर में सुबह से ही सन्नाटा छाया रहा, जिसके कारण इसका असर मुख्य बाजारों में शाम तक दिखाई पड़ा।
व्यापारियों ने तीन दिनों से बंद के लिए लाउडस्पीकर से शहर भर में प्रचार किया था। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जरूरी सामान खरीदने के लिए भटकते रहे। व्यापार मंडल के सभी संगठनों के जिलाध्यक्ष, सदस्य व वाणिज्यकर विभाग के प्रमुख अधिकारियों के साथ मंगलवार दोपहर डीआरडीए सभागार मेें एडीएम ने बैठक कर बात कराई।
एडीएम अनिल सिंह से व्यापारियों ने अपनी दिक्कतें बताई। इस पर एडीएम ने कहा कि अब वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी किसी व्यापारी के यहां छापेमारी नहीं करेंगेे। अधिकारी अब व्यापारी को नोटिस भेजकर उससे जवाब तलब करने के बाद कार्रवाई करेंगे। इस पर सभी व्यापारी सहमत हो गए।
एडीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि व्यापारियों ने वाणिज्यकर विभाग के जिन अधिकारियों की शिकायत की है, उनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी व्यापारी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। जिन व्यापारियों का गोदाम पंजीकृत नहीं है, उन्हें वाणिज्यकर विभाग नोटिस भेजेगा, न कि उनके यहां छापेमारी करेगा।