बाराबंकी। असंद्रा क्षेत्र के भवानियापुर गांव स्थित श्रीराम जानकी मठ की भूमि को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद ने मंगलवार को अत्यंत संवेदनशील मोड़ ले लिया। न्याय न मिलने से आहत मठ के महंत मुकुंदपुरी ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार समाधि लेने का प्रयास किया। सुबह करीब चार बजे वह करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में उतर गए। एसडीएम-सीओ ने पुलिस बल की मौजूदगी में 10 में से एक जमीन की खतौनी पर नाम अंकन किया, जिसके बाद महंत बाहर आए। वह करीब 10 घंटे तक गड्ढे में बैठे रहे।
मठ की भूमि को लेकर यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। महंत मुकुंदपुरी के अनुसार इस प्रकरण में 24 अगस्त 2023 को तहसीलदार न्यायालय ने संबंधित वसीयत को निरस्त करते हुए मूल खातेदार के पक्ष में निर्णय दिया था, किंतु आदेश का अनुपालन न होने से असंतोष बढ़ता गया। इसी के चलते महंत ने पूर्व में जिंदा समाधि लेने की चेतावनी दी थी।
मंगलवार भोर करीब चार बजे महंत मुकुंदपुरी परिसर में खुदे 10 फीट गहरे गड्ढे में जाकर मौन बैठ गए। एसडीएम रामसनेहीघाट अनुराग सिंह, सीओ जटाशंकर मिश्र समेत प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा अधिकारियों ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ महंत से वार्ता की।
प्रशासन ने तत्काल एक गाटा संख्या की भूमि मठ के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए। साथ ही शेष गाटा संख्याओं के संबंध में 45 दिनों के भीतर विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर मठ के नाम दर्ज कराने का लिखित आश्वासन दिया गया, तब जाकर महंत मानें।
ढाई साल पहले दी थी चेतावनी
महंत मुकुंदपुरी के अनुसार ब्रह्मलीन महंत राजेश्वर पुरी ने वर्ष 2003 में पंजीकृत वसीयत के माध्यम से मठ की समस्त चल-अचल संपत्तियां श्री नीलकंठ महादेव विराजमान ग्राम हरपालपुर के नाम संरक्षक के रूप में जूना अखाड़ा को समर्पित की थीं। इसके बावजूद एक अन्य व्यक्ति को संपत्तियों का हस्तांतरण किए जाने से स्थिति जटिल होती चली गई। इससे पूर्व महंत ने एक सितंबर 2023 को समाधि लेने के लिए गड्ढा खोदवाया था।
बाहर आते ही लगे जयकारे
प्रशासन के इस आश्वासन और साधु-संतों के आग्रह पर महंत मुकुंदपुरी दोपहर करीब 2:30 बजे गड्ढे से बाहर आए। सीओ ने उनको मिष्ठान खिलाया तो जयकारे लगने लगे। एसएचओ आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि मामला शांत हो गया है।