सावन के दूसरे सोमवार पर लोधेश्वर महादेव के दर्शन करने जाते भक्त।
- फोटो : सावन के दूसरे सोमवार पर लोधेश्वर महादेव के दर्शन करने जाते भक्त।
बाराबंकी। सावन का दूसरा सोमवार और भगवान लोधेश्वर महादेव की नगरी महादेवा...। भक्तों की आस्था चरम पर दिखी। उरई के माधवगढ़ से अविनाश नामक शिवभक्त ने 240 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा के दरबार में हाजिरी दी, तो सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र से बलराम, सेवक और राम लखन लेटते हुए शिव के चरणों तक पहुंचे। इन भक्तों को अपने आराध्य को जल अर्पित करने के लिए मात्र आठ से 10 सेकंड का समय मिलेगा, लेकिन इन कुछ क्षणों में उनकी आंखों में संतोष, चेहरे पर श्रद्धा और मन में पूर्णता का भाव स्पष्ट झलकता है। महादेवा में मेले के दृश्य बताते हैं कि आस्था का मोल समय से कहीं अधिक होता है।
सावन के पहले सोमवार को करीब 3 लाख श्रद्धालुओं ने लोधेश्वर महादेव को जल चढ़ाया था, लेकिन इस बार भीड़ और ज्यादा उमड़ी है। कारण है महादेवधाम का कॉरिडोर के रूप में विकास। माना जा रहा है कि यह स्वरूप, यह खुला आकाश, यह दर्शन का अनुभव शायद आगे के वर्षों में नसीब न हो। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने रविवार रात 12:15 बजे ही कपाट खोलने की घोषणा की, जबकि कतारें शाम से ही लगनी शुरू हो गई थीं। हर हर महादेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान है और महादेवा का कण-कण शिवमय हो गया है।
4000 से अधिक दुकानें, 1150 से अधिक पुलिसकर्मी
करीब 4000 से अधिक दुकानें मेले में सजी हैं। मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र को चार जोन और नौ सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हर जोन की सुरक्षा में एक सीओ तैनात हैं और कुल मिलाकर 1150 से अधिक पुलिसकर्मी मेले की व्यवस्था संभाल रहे हैं। सुरक्षा की निगरानी के लिए 103 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही एटीएस समेत खुफिया एजेंसियां भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि इस अभूतपूर्व भीड़ और सुरक्षा प्रबंधों के बीच सावन सोमवार की महिमा और भक्तों की श्रद्धा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि श्री लोधेश्वर महादेव का दरबार केवल आस्था का नहीं, आत्मिक ऊर्जा का भी केंद्र है।