हैदरगढ़। स्थानीय नगर पंचायत गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। इसकी आय बकाया देनदारियों और अधिक खर्चों के कारण कम पड़ रही है। करों की वसूली में भी नगर पंचायत पीछे है, जिससे जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
नगर पंचायत में लगने वाले करों से सालाना आय जरूरी कामों में खर्च होती है। बची लाखों रुपये की धनराशि सेवानिवृत्त कर्मियों की बकाया देनदारियों में जाती है। करीब 20 लाख रुपये पुराना बकाया वसूल होने पर पेंशनर्स का बकाया चुकता हो सकेगा। इससे नगर में अन्य आवश्यक कार्य भी पूरे हो सकते हैं। सेवानिवृत्त छह कर्मियों का करीब 30 लाख रुपये बकाया है। यह राशि शासन के निर्देशानुसार एक मुश्त दी जानी चाहिए थी।
राज्य वित्त योजना से सालाना मिले 32 लाख रुपये वेतन और पेंशन में खर्च होते हैं। बकाया देनदारियों व कर्मचारियों के वेतन पर भारी खर्च के बाद भी वसूली संतोषजनक नहीं मानी जा सकती। हैदरगढ़ के 12 वार्डों में लगभग 23 हजार लोग निवास करते हैं। कुल 3171 भवनों से गृहकर के मद में सालाना 372000 रुपये की आय होती है। जलकर के मद में सालाना 329400 रुपये प्राप्त होते हैं। पानी सप्लाई रखरखाव, पड़ाव अड्डा, दुकान किराया, चार टैंकर और दो बारात घर से कुल सालाना आय 29 लाख रुपये से अधिक है। नगर में सफाई, बिजली पानी रखरखाव, चूना ब्लीचिंग और कीटनाशकों के छिड़काव में सालाना 20 से 25 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं।
बकाया देनदारियां और वसूली की स्थिति
वित्तीय वर्ष 2025-26 का अंतिम माह है। करों और पड़ाव अड्डा आदि के मद में करीब 20 लाख रुपये का पुराना बकाया है, जिसकी वसूली नहीं हो पाई है। अधिशासी अधिकारी इंद्रभान ने बताया कि वसूली और आय के नए स्रोत तलाशने पर कार्य किया जा रहा है।