बाराबंकी। ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने वाले लाउडस्पीकर बिना लाइसेंस शुल्क चुकाए ही मुफ्त में शोर मचा रहे हैं। लाउडस्पीकर का प्रयोग करने से पहले इनका पंजीकरण नगर पालिका में कराकर शुल्क भी जमा करना होता है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते शुल्क देना तो दूर लोग इसका पंजीकरण तक कराना मुनासिब नहीं समझते हैं।
शहर में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में धडल्ले से लाउडस्पीकर का प्रयोग किया जाता है। लाउडस्पीकर के साथ ही अब साउंड बॉक्स का भी प्रयोग किया जाने लगा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद योगी सरकार ने लाउडस्पीकर उतरवाने का अभियान भी संचालित किया था। कोर्ट स्तर से न्यूनतम आवाज के साथ धार्मिक स्थलों पर एक-एक लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति ही दी गई थी। इसके बावजूद प्रचार प्रसार व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बिना झिझक तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जा रहे संचालित होते हैं। इसके बावजूद नगर पालिका की आय में लाउडस्पीकर शुल्क मद से आमदनी सिफर बनी है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर पालिका ने लाउडस्पीकर शुल्क के रूप में 20 हजार रुपये आमदनी का प्रस्ताव रखा था। लेकिन फरवरी 2025 तक एक पाई भी खाते में जमा नहीं हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 10 हजार घटाकर मात्र 10 हजार रुपये की आय इस मद प्रस्ताव में की गई। नगर पालिका यदि लाउडस्पीकरों के पंजीकरण पर बल दे तो आमदनी के साथ ही इनकी आवाज पर नियंत्रण भी किया जा सकता है।
नगर पालिका के कर अधिकारी कमलेश चौबे ने बताया कि धार्मिक आयोजनों में प्रयोग होने वाले लाउडस्पीकरों पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। लेकिन प्रचार-प्रसार व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल वाले लाउडस्पीकरों का लाइसेंस शुल्क प्रतिदिन के हिसाब से चुकाना होता है। पिछले वित्तीय वर्ष में इस मद में कोई भी आय नगर पालिका को नहीं हुई।