सरकारी धान खरीद पर व्यापारी हावी हैं। यही कारण है कि धान बेचने के लिए क्रय केंद्रों से अधिक व्यापारियों के यहां किसानों की भीड़ देखी जा रही है। मंडी में दिए गए अभिलेखों की मानें तो व्यापारी अब तक छह लाख क्विंटल (छह हजार मीट्रिक टन) धान खरीदकर किसानों को करीब 24 करोड़ रुपये की चपत लगा चुके हैं। मगर संबंधित अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले में सीधे किसानों से धान खरीदने के लिए छह एजेंसियों ने 41 क्रय केंद्र खोले हैं। शासन ने इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य 78 हजार मीट्रिक टन निर्धारित किया है। जिसके सापेक्ष अभी तक महज 37 हजार एमटी धान ही खरीदा जा सका है। जबकि मंडी के आंकड़ों के मुताबिक छह लाख क्विंटल (छह हजार मीट्रिक टन) धान व्यापारी खरीद चुके हैं। ये धान व्यापारियों ने घोषित समर्थन मूल्य 1410 रुपये की दर से नहीं बल्कि औने-पौने दाम पर खरीदा है।
इस बार धान खरीद देर से शुरू होने का व्यापारियों ने खूब फायदा उठाया और जरूरतमंद किसानों से औने-पौने दाम पर धाम खरीदकर मोटा मुनाफा कमाया। किसानों का कहना कि किसी भी व्यापारी ने एक हजार रुपये प्रति क्विंटल से अधिक दाम पर धान की खरीद नहीं की। इस तरह से व्यापारी अब तक किसानों को करीब 24 करोड़ रुपये का चूना लगा चुके हैं। मगर विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। आज तक किसी भी व्यापारी के यहां न तो छापा डाला गया और न ही जांच पड़ताल कराई गई। नतीजतन व्यापारियों का किसानों से औने-पौने दाम पर धान खरीदना जारी है।