महादेवा (बाराबंकी)। लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र लोधेश्वर महादेवा हजारों लोगों को रोजगार भी दे रहा है। सावन के पांच सोमवार क्षेत्र के ही करीब ढाई सौ दुकानदारों के लिए आमदनी का अच्छा साधन बनकर सामने आए। मेले में हुई कमाई से सालभर का खर्च चलाने की जुगत लगा ली गई है।
महाभारत कालीन लोधेश्वर महादेवा में कई मेले लगते हैं। इनमें सावनभर चलने वाला मेला प्रमुख होता है। खासकर हर सोमवार को यहां जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु यहां से प्रसाद के रूप में गृहस्थी का सामान व पूजन सामग्री भी ले जाते हैं। महादेवा के चारों ओर दुकानें खुली हैं। रेलवे क्रॉसिंग से मेला परिसर पहुंचने तक यह दुकानें मिल जाती हैं।
इसके बाद महादेवा सूरतगंज मार्ग पर जहां बैरिकेडिंग शुरू होती है, उसके दोनों ओर दुकानें सजी हैं। यहां करीब पांच दर्जन लोग तो माला फूल, बेलपत्र, धतूरा भांग बेच रहे हैं। साथ में लोटा भी उपलब्ध करा रहे हैं। इसी प्रकार ढोलक, मथानी, चिमटा, बेलन, लकड़ी के अन्य सामान, सिंदूर, बिंदी, कड़ा, माला और साजो शृंगार की अन्य तमाम चीजें बिक रही हैं। मेला परिसर में चाट, फल और इसी तरह की खाद्य पदार्थ की अन्य दुकानें भी सजी हैं। करीब दो दर्जन लोग तो केवल चंदन लगाने का कार्य कर रहे हैं।
हारमोनियम, ढोलक के परंपरागत कलाकार यहां गायन और वाद्य यंत्र बजाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करके धन कमा रहे हैं। खास बात यह है कि ढोलक, लकड़ी के सामान वाले दुकानदार अधिकतर मुस्लिम हैं। महादेवा आने वाले लोग यहां से शिवलिंग की फोटो ले जाना नहीं भूलते। इसलिए महादेव के मंदिर और शिवलिंग की फोटो खूब बिक रही है। दुकानदार शेर अली बताते हैं कि सावन में महादेवा मेला श्रद्धा ही नहीं, बल्कि रोजगार का भी केंद्र बिंदु बन जाता है। यहां दुकान लगाने वाले राकेश, राम अजोर, आशुतोष आदि ने बताया कि इस बार सावन में आठ सोमवार पढ़ने से अच्छी आमदनी की उम्मीद है।