मसौली/त्रिलोकपुर। बाराबंकी-बहराइच हाईवे पर अचानक चीख-पुकार मची तो आसपास के लोग दौड़ पड़े। सामने का मंजर देखकर हर कोई सिहर उठा। कार का बायां हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त था। हादसे के बाद कार डंपर में फंस कर करीब 50 मीटर तक घिसटती गई। जिससे कार में बैठे लोग बुरी तरह फंस गए थे। सिर्फ उनके कराहने की आवाजें ही बाहर आ रही थीं। हादसे में घायल सात साल की बच्ची अब्बू-अम्मी को पुकारते-पुकारते बेसुध हो गई।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर कार में फंसे लोगों को कैसे निकाला जाए। कुछ ही देर में राहगीरों और स्थानीय लोगों ने मोर्चा संभाल लिया। किसी ने कार का गेट मोड़ा तो किसी ने बॉडी को खींचा। करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा सका।
इसी बीच पुलिस भी आ गई। पांचों को तीन एंबुलेंस से सीएचसी बड़ागांव पहुंचाया गया। करीब 15 मिनट बाद चिकित्सकों ने मौलाना शरीफ, उनकी पत्नी तबस्सुम बानो, बेटे मो. उजैम और बेटी रुश्दा को मृत घोषित कर दिया। उधर, एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंची मासूम हुदा बदहवास थी। बच्ची ने बताया कि कार में उसके पिता, मां और भाई-बहन थे। सभी लोग लखनऊ अपनी बुआ को देखने जा रहे थे। दर्द के बीच वह बार-बार अब्बू और अम्मी को पुकार रही थी। मसौली के एसएचओ अजय प्रकाश त्रिपाठी के अनुसार आधार कार्ड से मृतकों की पहचान की गई।
डंपर छोड़ खेतों की ओर भागा चालक
हादसे के तुरंत बाद डंपर चालक वाहन छोड़कर सड़क किनारे खेतों की ओर भाग निकला। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक टक्कर के बाद कुछ देर तक वहां अफरातफरी मची रही। लोग चाहकर भी चालक को पकड़ने नहीं दौड़े क्योंकि कार का मंजर इतना भयावह था कि सभी राहत कार्य में जुट गए।
प्रभावित रहा यातायात, पहुंचे एआरटीओ
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस करीब 15 मिनट में मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार और डंपर को सड़क से हटवाया। इस दौरान करीब आधा घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। सीओ गरिमा पंत के साथ ही एआरटीओ अमिताभ राय ने भी मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। उन्होंने बताया कि डंपर बिहार में पंजीकृत है और गोंडा के किसी व्यक्ति के नाम है। जांच में दोनों वाहनों के कागज और अन्य औपचारिकताएं पूरी मिली।
शवों से लिपटकर बिलखते रहे तीन बेटे
हादसे की खबर मिलने के बाद मौलाना शरीफ के बेटे शुएम (21), शुरेम (18) और नुएम (15) भी बड़ागांव सीएचसी पहुंचे। अपनों को इस हालत में देखकर शुएम गश खाकर गिर पड़े। शुरेम और नुएम माता-पिता के शवों से लिपटकर काफी देर तक बिलखते रहे। शुएम को होश आया तो वह अब्बू और अम्मी को उठाने की कोशिश करने लगे। तीनों बेटों की आंखों के सामने ही पूरा परिवार उजड़ चुका था।