बाराबंकी। नौनिहालों के मानसिक विकास और उनके अंदर रंग भेद की पहचान कराने को लेकर अब कक्षा एक से चार में कला का ज्ञान कराया जाएगा। उनके पाठ्यक्रम में पहली बार कला की किताब भी जोड़ी गई है। जिसके तहत अब नौनिहाल जहां बांसुरी से कलाकारी सीखेंगे, वहीं किसलय से रंग भरना सीखेंगे।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 2618 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें 1781 प्राथमिक स्कूलों में अभी तक कक्षा एक और दो में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की हिंदी, अंग्रेजी, गणित विषय की पढ़ाई कराई जाती थी। वहीं कक्षा तीन और चार में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, संस्कृत और सोशल साइंस की पढ़ाई कराई जाती थी।
नए शैक्षिक सत्र 2026-27 में अब मांटेसरी स्कूलों की तर्ज पर कक्षा एक से चार तक के 1.36 लाख नौनिहालों में कला व रंग का ज्ञान कराने के लिए पहली बार पाठ्यक्रम में कला की पुस्तक किसलय और बांसुरी को जोड़ा गया है। इसका वितरण भी स्कूलों को किया जा रहा है। कक्षा एक और कक्षा दो में किसलय नाम की कार्य पुस्तिका में रंग भरने का बच्चों को ज्ञान होगा।
वहीं कक्षा तीन और कक्षा चार में बांसुरी कला की पाठ्य पुस्तक से बच्चें कलाकारी सीखेंगे। जिला समन्वयक प्रशिक्षण विनीता मिश्रा ने बताया कि परिषदीय स्कूल के नौनिहालों के मानसिक विकास को लेकर पहली बार कक्षा एक से चार तक पाठ्यक्रम में कला विषय को जोड़ा गया है।