बाराबंकी। सदर तहसील की ग्राम पंचायत पल्हरी के सोहराबाद गांव में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर करोड़ों की 20 हजार वर्गफीट जमीन की वरासत कराकर बेच दिया गया। प्रशासन को भनक लगते ही खलबली मच गई।
जांच में फर्जीवाड़ा सामने आते ही मंगलवार देर शाम छह आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व साजिश का केस दर्ज कर लिया गया। पुलिस ने जांच शुरू की है तो एसडीएम ने विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। पल्हरी के लेखपाल कमलेश कुमार शर्मा की तहरीर के मुताबिक 13 फरवरी को सोहरामऊ गांव के मंसाराम ने जमीन की वरासत के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उसने खुद को कौशल्या पत्नी रामसागर का इकलौता वारिस बताया और नौ जून 2024 को उनकी मृत्यु का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर दावा ठोक दिया।
जांच के दौरान गांव के ही अभय राज राजपूत, प्यारेपुर सरैया के चंदन, सोहराबाद के राम मनोहर, शोभाराम और प्रदीप ने भी झूठी गवाही देकर मंसाराम का पक्ष लिया। जल्दबाजी में ही लेखपाल ने वरासत की संस्तुति कर दी और जमीन मंसाराम के नाम चढ़ गई।
जैसे ही जमीन मंसाराम के नाम हुई, उसने अपने साथियों के साथ मिलकर भूमि बेच दी लेकिन जब प्रशासन को शक हुआ और दोबारा जांच की गई तो बड़ा खुलासा हुआ। यह जमीन असल में सिद्धौर के वाकरगंज निवासी राजदेई के नाम दर्ज थी जिस पर पहले से मुकदमा चल रहा था।
राजदेई के मृत्यु प्रमाणपत्र पर कौशल्या लिखकर गुमराह किया गया। जैसे ही घोटाले की पुष्टि हुई, तहसील प्रशासन ने 11 मार्च को वरासत निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। लेखपाल ने स्वीकार किया कि यह एक संगठित साजिश थी जिसके तहत सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी वरासत कराई गई।
मंगलवार शाम मंसाराम समेत पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और सरकारी सेवक को गुमराह करने के आरोप में केस दर्ज कर लिया।