हैदरगढ़ (बाराबंकी)। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए अधिगृहीत जमीन के एवज में किसानों को ज्यादा मुआवजा बांटने का मामला तूल पकड़ने लगा है। प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए यूपीडा की तरफ से हुए अधिगृहीत जमीन के सभी बैनामों की जांच का फैसला किया है। ताकि मूल खतौनी के बिना गलत आंकलन के कारण किसानों के खाते में गयी अधिक राशि की रिकवरी करायी जा सके।
साढ़े चार साल पहले हुई रजिस्ट्री में रकबा अधिक होने से किसानों के खाते में मुआवजा की करीब 38 लाख ज्यादा धनराशि भेज देने का मामला बीते दिन पकड़ में आया था। इस मामले में यूपीडा के पक्ष में दाखिल खारिज करने के दौरान तहसीलदार कोर्ट में मौजूद अभिलेखों में छेड़छाड़ कर किसानों को लाभ पहुंचाने की कोशिश के आरोपी लेखपाल को निलंबित कर पुलिस में केस दर्ज कराया गया है। इसे लेकर पूर्वांचल भूमि अधिग्रहण से जुड़े लेखपालों व बिचौलियों में हड़कंप है।
मंगलवार को एसडीएम हैदरगढ़ शालिनी प्रभाकर ने बताया कि पूरे मामले में निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करने को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे भूमि अधिग्रण के लिए किसानों से लिए गए सभी रजिस्टर्ड बैनामों की जांच होगी। इसके लिए अधिग्रहण में शामिल राजस्व कर्मियों की अलग अलग टीमें तहसीलदार की अगुवाई में गठित की जा रही है जो तय समय मे जांच करके रिपोर्ट देगी। जिले में करीब 40 किमी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए 36 गांवो की पांच सौ हेक्टेयर सरकारी व निजी भूमि अधिग्रहीत की गई है ।
अधिग्रहण के लिए यूपीडा ने राजस्व कर्मियों के माध्यम से किसानों से 1965 बैनामों की रजिस्ट्री उप निबंधक कार्यालय में कराई। भूमि की रजिस्ट्री के दौरान कई जगह से धांधली की शिकायत होने पर राजस्व कर्मियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे।
उजागर हुए मामले में दोनों नंबरों की रजिस्ट्री में 308 एकड़ भूमि अधिक दर्ज हो गई जिससे दो किसानों के खाते में 37 लाख 22 हजार व चार किसानों के खाते मे 67 हजार रुपया अधिक मुआवजा राशि भेज दी गयी। ऑनलाइन अमलदरामद के दौरान मामला पकड़ में आने पर एसडीएम ने संबंधित लेखपाल रजनी तिवारी को निलंबित कर पुलिस में गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराने की कार्रवाई की गयी है।