सूरतगंज। नेपाल में जलप्रलय व बरसात के बीच एक दिन पहले बैराजों से छोड़े गए 1.64 लाख क्यूसेक पानी ने अब सरयू के जलस्तर पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। इससे नदी का जलस्तर घटने के बाद फिर से हर घंटे तीन सेमी की रफ्तार से बढ़कर खतरा बढ़ाने लगा है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण केदारीपुर में दो घरों की जमीन बह गई जबकि 250 बीघा फसल बर्बाद हो गई। सोमवार शाम नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज 17 सेमी नीचे था।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक जलस्तर हर घंटे करीब तीन सेंटीमीटर बढ़ रहा है। इससे तटवर्ती गांवों में बाढ़ का अंदेशा बना हुआ है। आने वाले दिनों में बारिश के कारण जलस्तर और बढ़ा तो तराई इलाके के लोगों की मुश्किलें गहरा सकती हैं। रामनगर तहसील के केदारीपुर गांव में लालता प्रसाद निषाद और राजकुमार दीक्षित के मकानों के नीचे की जमीन नदी में समा चुकी है। कटान को देखते हुए दोनों परिवार पहले ही छप्पर और गृहस्थी का सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए थे।
छोटेलाल, अमृतलाल, आनंद, नान, मोनू और इंदर सहित कई ग्रामीण भी घर खाली करने में जुटे हैं। सोमवारा को ग्रामीण घरों के आसपास लगी सोलर लाइट तक उखाड़कर सुरक्षित जगह ले जाते नजर आए। कुछ लोग अपने मकान की ईटें स्वयं तोड़कर ले जाते दिखे। उन्हें डर है कि अगली लहर में न जाने क्या होगा। ग्रामीण घनश्याम, रोहित, आशीष, इंद्रपाल, अमीन, अमृतलाल, लालता प्रसाद और राजकुमार बताते हैं कि करीब 250 बीघा धान, उड़द, भिंडी और परवल की फसल सरयू में समा चुकी है। इससे अब घर बचाने के साथ रोजी-रोटी की दोहरी समस्या उन्हें परेशान करने लगी है। (संवाद)
बिना स्टीमर कैसे मिलेगी तत्काल राहत
केदारीपुर के ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ और कटान की स्थिति बनी हुई है लेकिन मौके पर एक स्टीमर तक बचाव कार्य के लिए उपलब्ध नहीं है। ऐसे में तत्काल राहत पहुंचाना मुश्किल होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कटानरोधी कार्य तेज कराने, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। उधर, सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के बबुरी, घुटरू और सिरौलीगुंग गांव भी 10 से अधिक किसानों की 35 बीघा जमीन नदी में समा चुकी है। बबुरी गांव के पास कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड ने परक्यूपाइन लगाकर झाड़-झंखाड़ डाला है लेकिन नदी की धार के सामने यह इंतजाम बेअसर नजर आ रहा है।