बाराबंकी। जिले में लंंपी वायरस तेजी से फैल गया है। 55 पशु इसकी चपेट में अब तक आ चुके हैं। इसे लेकर पशुपालकों में दहशत है। वहीं शासन ने इसके लिए नोडल अधिकारी की निगरानी में एक जांच टीम भी गठित कर दी है, जो शनिवार को हरख व बनीकोडर ब्लॉक के चार गांवों में पहुंची और जांच कर पशुओं का इलाज किया।
लंपी वायरस को लेकर हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है। बड़ी संख्या में वायरस से ग्रस्त पशु मिले हैं। ऐसे में अलग-अलग ब्लॉक के 11 गांवों को चिह्नित कर पशुओं का इलाज शुरू करने का दावा पशुपालन विभाग कर रहा है। वायरस की वजह से पशुओं के शरीर में पड़ी गांठ व दाने का नमूना जांच के लिए बरेली भेजा गया है। वहीं शासन ने पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक (एमडी) आईएएस आनंद कुमार सिंह की निगरानी में जांच कमेटी गठित की है। ऐसे में पशुपालक घबराए हुए हैं। उनका कहना है कि समय रहते कोई जांच के लिए नहीं आता है। बीमारी बढ़ने के बाद तरह-तरह के निर्देश जारी कर दिए जाते हैं। हालांकि इस वायरस को लेकर पशुपालकों में जानकारी का अभाव है। वहीं जिम्मेदार भी लोगों को जागरूक करने में असफल साबित होते नजर आ रहे हैं।
हरख, बंकी, बनीकोडर, हैदरगढ़ आदि ब्लॉक के करीब 11 गांवों में 55 पशु लंपी वायरस से ग्रसित पाए गए हैं। शनिवार को शासन की ओर से नामित टीम एमडी की अगुवाई में हरख के नीदनपुर, मवैया, टिकराघाट व बनीकोडर ब्लॉक के अमहिया गांव में पहुंची। जहां उन्होंने पशुओं की जांच की और निर्देश दिए कि घर-घर जाकर वैक्सीन लगाई जाए। साथ ही वायरस से ग्रसित पशुओं को गांव से बाहर निकालकर इलाज किया जाए। इसके लिए सभी ब्लॉकों में सर्विलांस टीम गठित कर दी गई है। एमडी की निगरानी में गांव पहुंची टीम के साथ एडीएम अरुण कुमार सिंह भी मौजूद रहे। इसके अलावा संक्रमित दो गोवंशों के सैंपल आईवीआरआई इज्जतनगर बरेली भेजने के निर्देश एमडी ने दिए हैं।
वायरस के लक्षण
लंपी पशुओं में होने वाला एक प्रकार का त्वचा संबंधी रोग है, जो संक्रामक होता है। इसका वायरस मच्छर और मक्खियों के जरिए एक से दूसरे पशु में आसानी से फैल जाता है। इसकी वजह से पशुओं के शरीर में छोटी-छोटी गांठ व दाने हो जाते हैं, जिससे उनके शरीर में जख्म नजर आने लगते हैं। पशु के मुंह, गले, श्वास नली तक इस वायरस का असर दिखता है। साथ ही इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और पशु खाना भी कम कर देता है। ऐसे में दुग्ध उत्पादकता में कमी, पैरों में सूजन, गर्भपात के साथ-साथ मौत भी हो जाती है।
नहीं है कोई दवा
पशु विशेषज्ञों की मानें तो लंपी वायरस के उपचार के लिए कोई विशेष दवा अब तक उपलब्ध नहीं है। पिछले वर्ष इससे निपटने के लिए गोटपॉक्स वैक्सीन लगाई गई थी, जो काफी प्रभावी रही। इसी बार भी इसी वैक्सीन को मंगाया गया है।
ऐसे करें बचाव
लंपी वायरस मच्छर और मक्खियों के जरिए फैलता है। ऐसे में पशुओं के आसपास सफाई रखने की आवश्यकता होती है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार भी खिलाएं और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण व वैक्सीन लगवाएं। विशेषज्ञों की मानें, अगर पशु लंपी की चपेट में आ जाए तो उसे बाकी पशुओं से दूर रखकर इलाज करें।
लंपी वायरस से पशुओं को बचाने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई है। 90 हजार वैक्सीन मंगाई गई थीं, जिनमें से 44000 पशुओं को लगा दी गई हैं। 55 पशु वायरस की चपेट में पाए गए, जिनमें से 41 का उपचार कर उन्हें ठीक कर दिया गया है। 14 का उपचार किया जा रहा है।
- धर्मेंद्र कुमार पांडेय, सीवीओ