रामसनेहीघाट। मालिनपुर गांव की ललिता देवी ने अपनी मेहनत, लगन और आधुनिक तकनीक के सहारे मशरूम की खेती से खुद के साथ ही गांव की 50 से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है। वर्ष 2005 में छप्पर की छांव से शुरू हुआ मशरूम खेती का सफर अब एयरकंडीशन फार्म हाउस तक पहुंच गया है।
ललिता देवी के फार्म में तैयार मशरूम की मांग न केवल बाराबंकी जिले में है, बल्कि गोरखपुर, सुल्तानपुर, अयोध्या, लखनऊ, कानपुर और दिल्ली जैसे शहरों तक भी है। सामान्य दिनों में मशरूम 170 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिकती है, शादी-विवाह जैसे सीजन में इसकी कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। मशरूम उत्पादन से उन्हें हर महीने करीब पांच लाख रुपये तक का मुनाफा आसानी से हो जाता है।
ललिता देवी ने बताया कि वर्ष 2005 में गांव के कुछ लोगों को मशरूम की खेती करते देख उन्होंने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया। उस समय संसाधन सीमित थे। उन्होंने छप्पर के नीचे मशरूम उगाने की शुरुआत की। वर्ष 2024 में, उन्होंने दो आधुनिक एयर कंडीशनिंग (एसी) उत्पादन कक्ष तैयार कराए। वह गांव की अन्य महिलाओं को भी मशरूम की खेती से जोड़ कर आत्मनिर्भर बनाने के साथ महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी सकारात्मक कार्य कर रही हैं।
ललिता देवी के अनुसार, मशरूम की एक फसल तैयार होने में लगभग 40 दिन लगते हैं। इसके बाद, लगभग 25 दिनों तक तुड़ाई की जाती है और फिर बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती शुरू करने के बाद से परिवार की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब उनके दोनों बेटे पढ़ाई के साथ-साथ फार्म के संचालन में भी सहयोग करते हैं। (संवाद)