विज्ञान वर्ग में किताबी ज्ञान से प्रयोगात्मक कार्य अधिक महत्वपूर्ण है। लेकिन राजकीय व अनुदानित कॉलेजों में प्रयोगात्मक कार्य की स्थिति बदहाल है। प्रयोगशालाओं में धूल जमी है। उपकरण व केमिकल की शीशियां तो महीनों से अपने स्थान से हटाई ही नहीं गई हैं। लैब में रसायन विज्ञान की प्रयोग सामग्री अलमारियों में बंद हैं। छात्र-छात्राओं को प्रयोग कार्यों की जानकारी कक्षाओं में ही दी जा रही है जिससे उन्हें प्रयोग की कोई खास जानकारी भी नहीं हो रही है।
यूपी बोर्ड परीक्षा-2016 फरवरी के शुरुआत में ही कराए जाने की उम्मीद है। लेकिन अभी तक राजकीय व अनुदानित कॉलेजों में प्रयोगात्मक कार्य ही नहीं कराए जा रहे हैं। बताते चलें कि जनपद में 71 राजकीय व अनुदानित कॉलेज हैं। इसमें 35 कॉलेज अनुदानित हैं जबकि दो कॉलेज आश्रम पद्घति से संचालित हैं। राजकीय कॉलेजों में 13 के पास ही अपनी लैब है। अन्य कॉलेेजों में अभी प्रयोगशालाओं की व्यवस्था हीं नहीं है। अनुदानित कॉलेजों में लैब है लेकिन बदहाल हैं।