बाराबंकी। जिले के पांच एचआईवी सेंटरों पर करीब 15 दिनों से जांच में प्रयोग की जाने वाली किट नहीं है। ऐसेे में जांच ठप हो गई है। हालत यह है कि जिला अस्पताल में ऑपरेशन टल रहे हैं। इन हालातों के बाद अधिकारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। कुछ लोगों ने निजी केंद्रों से किट खरीदकर जांच करवानी शुरू कर दी है।
जिले में एचआईवी की जांच के लिए पांच केंद्र है। जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, हैदरगढ़ सीएचसी, फतेहपुर सीएचसी व रामसनेहीघाट में एचआईवी की जांच होती है। सर्जरी के ऑपरेशन करने से पहले होने वाली जांचों में एचआईवी जांच भी शामिल होती है, लेकिन पिछले 15 दिनों से इन सेंटरों पर जांच किट नहीं है। जिला अस्पताल में बनाए गए सेंटर पर हर महीने पांच सौ से अधिक जांचेें होती हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि 25 दिन में केवल यहीं से ढाई सौ से अधिक लोग बिना जांच के लौटे हैं।
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में ऑपरेशन से पहले जांच कराने गए लोगों से बताया गया कि किट नहीं है। हालांकि जिला अस्पताल में डॉ. राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट का रेफरल सेंटर संचालित किया जा रहा है। जहां जांच संभव है, मगर नमूना भरने के बाद उसे लखनऊ भेजा जाता है और उसके बाद जांच रिपोर्ट दी जाती है। हैदरगढ़ सीएचसी में भी किट नहीं होने से विषम हालात हैं। यहां के अधीक्षक डॉ. ओपी कुरील ने बताया कि किट की मांग भेजी गई है। जरूरी जांच कराने के लिए नमूना ऊपर भेजा जाता है।
महिला अस्पताल में दूसरे कार्यक्रम की किट से जांच
जिला महिला अस्पताल के सेंटर पर किट न होने से प्रसूताओं के सिजेरियन ऑपरेशन प्रभावित न होने पाएं, इसे लेकर दूसरे कार्यक्रम के तहत आई किटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीएमएस डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि सेंटर पर किट न होने से अस्पताल को एक दूसरे कार्यक्रम के तहत मिलने वाली किटों का प्रयोग किया जा रहा है। दो तीन दिनों में किट आ जाएंगी।
बोले अधिकारी
हमारे पास किट की कमी नहीं है। जिला अस्पताल में किट नहीं होने की जानकारी मुझे नहीं है। इस संबंध में सीएमएस से वार्ता कर मांग पत्र भिजवाया जाएगा।
- डाॅ. अवधेश यादव, सीएमओ
एचआईवी जांच करने वाली किट की आपूर्ति नाको की ओर से की जाती है। किट न होने से कोई ऑपरेशन प्रभावित नहीं है। क्योंकि डॉ. राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट के रेफरल सेंटर पर नमूना देकर जांच करवाने की सुविधा है। किट को लेकर नाको को मांग भेज दी गई है।
- डॉ. ब्रजेश कुमार, सीएमएस