बाराबंकी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले के उच्च अलिया स्तर के मदरसों में कामिल और फाजिल की पढ़ाई और परीक्षाएं बंद कर दी गई हैं। इससे इनमें पढ़ाई कर रहे 1241 छात्रों का भविष्य अधर में है। अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि उनकी आगे की शिक्षा किस विश्वविद्यालय से जुड़ेगी। जनपद में कुल 320 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं, जिनमें से 59 मदरसों में यह शिक्षा दी जा रही थी। पहले उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड इन परीक्षाओं का आयोजन कर डिग्री प्रदान करता था, लेकिन अब इस पर रोक लग गई है।
पांच नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड केवल 12वीं तक की शिक्षा दे सकता है, जबकि कामिल और फाजिल जैसी उच्च डिग्रियां प्रदान करना यूजीसी अधिनियम के खिलाफ है। इस फैसले के बाद छात्रों के समक्ष बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वर्तमान में यह स्पष्ट नहीं है कि इन छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए किस विश्वविद्यालय से जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरी चिंता है, क्योंकि अब तक कोई वैकल्पिक समाधान नहीं निकल पाया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बालेंदु द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट के आदेश में कामिल और फाजिल सिर्फ डिग्री है इसको कोई बोर्ड जारी नही कर सकता है। यह यूूूजीसी प्रावधानों के प्रतिकूल है। इस लिए इन विषयों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है।