बाराबंकी। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते जिले में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) परेशानी का सबब बन गई है। योजना के तहत प्रसव के बाद मिलने वाली धनराशि का भुगतान पिछले पांच माह से प्रसूताओं के खाते में नहीं पहुंचा है। इस पाने के लिए तीमारदार को अस्पतालों के चक्कर काट कर परेशान होना पड़ रहा है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को प्रसव के बाद सेहतमंद रहने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये की धनराशि दी जाती है। जिले के सरकारी अस्पतालों में मार्च से अब तक करीब 24257 प्रसव हुए। इनमें से 2223 प्रसूताएं ऐसी हैं जिनके खातों में पांच माह बीत जाने के बाद भी जेएसवाई का पैसा खातों में नहीं पहुंच रहा है। इसकी शिकायत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार परेशानी से राहत दिलाने को उदासीन बने हैं।
सही जवाब नहीं देते कर्मी
हासेमऊ निवासी समर ने बताया कि उनकी पत्नी को मार्च माह में प्रसव हुआ था। अस्पतााल से छुट्टी के दौरान सभी प्रकार के अभिलेखा जमा करा लिए गए थे लेकिन जेएसवाई के तहत मिलने वाला पैसा अभी तक नहीं मिल सका।
प्रसव के चार माह भी नहीं मिला पैसा
जहांगीराबाद निवासी राहुल ने बताया कि उनकी पत्नी को मार्च माह के अंतिम सप्ताह में आपरेशन से प्रसव हुआ था। अस्पताल से छुट्टी के दौरान सभी प्रकार के कागजात जमा करा लिए गए थे लेकिन जेएसवाई के तहत मिलने वाला पैसा आज तक खाते में नहीं आया।
जेएसवाई का पैसा निर्धारित समय के अंदर प्रसूताओं के खाते में भेजने का निर्देश है। इसके बावजूद भी यदि पैसा निर्धारित समय में खातों में नहीं पहुंच रहा है तो तो इसकी जांच करा कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ