टिकैतनगर (बाराबंकी)। घाघरा का जलस्तर घटने के साथ कटान काफी तेज हो गई है। साथ ही चरसड़ी बांध को खतरा और बढ़ गया है। इस बांध को बचाने के लिए बनाए गए छह स्पर में चार स्पर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए है जबकि अन्य दो स्पर भी कटान की चपेट में हैं। बांध की कटने की संभावना के चलते प्रशासन द्वारा तीन गांवों को खाली कराया जा रहा है जबकि रायपुर मांझा गांव पूरी तरह से खाली कराया जा चुका है। घाघरा नदी में हो रही कटान को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। गोंडा व बाराबंकी के डीएम मौके पर जमे हुए हैं।
घाघरा नदी का जलस्तर ठहर गया है, लेकिन साथ ही कटान ने तेजी पकड़ ली है जिससे प्रशासन के हाथ पांव फूल रह रहे हैं। स्थानीय लोगों में भी दहशत का माहौल है। चरसड़ी बांध को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने किलोमीटर संख्या 10 से 12.800 किमी तक छह स्पर बनाए थे, लेकिन कटान के चलते स्पर दो, तीन, चार तो पूरी तरह से नष्ट हो गए है जबकि एक नंबर स्पर को भी काफी क्षति हुई है। कटान का असर स्पर पांच व छह पर भी दिखने लगा है। स्परों का भारी नुकसान होनेे से चरसड़ी तटबंध को बचाना प्रशासन व सिंचाई विभाग के लिए चुनौती बन गया है। खतरे की आशंका के चलते रायपुर मांझा गांव को पूरी तरह से खाली करा दिया गया जबकि परसावल, नयापुर व कमियार गांव को खाली कराया जा रहा है। गांव को खाली कराए जाने पर तमाम परिवार बांध पर अपना डेरा डाल दिए हैं जबकि कई अपनी रिश्तेदारी जा रहे हैं। बांध को खतरा भंपते हुए गोंडा क्षेत्र के घरकुईयां, ढयोली, रकसड़िया, पूरे अंगद, काशीपुर, प्रतापपुर सहित करीब 55 गांव खाली कराए जा रहे हैं। कटान की तेजी से बंधों पर नजर रखने के लिए जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र व गोंडा के जिलाधिकारी तटबंध पर ही डेरा जमाए हुए हैं। ठोकरों को बचाने का प्रयास किए जा रहे हैं।