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नदी में समाए मकान, अब सिर छिपाने का संकट

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28 बाराबंकी : सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के करौनी गांव में सरयू नदी की कटान को लेकर घर तोड़ कर ईंट निकालत? - फोटो : BARABANKI
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कोटवाधाम (बाराबंकी)। तराई के लोगों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। जिन लोगों के मकान नदी में समा गए हैं, उनके समाने सिर छिपाने के लिए अब कोई ठिकाना नहीं बचा है। ऐसे लोग अपने परिवारीजनों के साथ तटबंध पर जीवन गुजार रहे हैं। गन्ना, धान आदि की फसलें नदी में बह जाने से ज्यादातर परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं लेकिन इनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है। जिम्मेदार भी इनकी समस्याओं से पूरी तरह से बेखबर हैं।
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तराई के सात गांवों, भैरवकोल में दो, तेलवारी में छह, करोनी में 7, टेपरा में 3, कहारनपुरवा में पांच और इटहुआ पूर्व में पांच, इस तरह से अब तक 28 मकान नदी की धारा में समा चुके हैं। यहां के लोग परिवारीजनों के साथ तटबंध पर तिरपाल के नीचे जीवन गुजार रहे हैं। अब गांवों से पानी निकल गया है लेकिन मकान न होने की वजह से बाढ़ पीड़ितों के सामने सिर छिपाने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा है। ग्राम करोनी के मिश्रीलाल, अलखराम, सुरेश, श्रीकिशन, रामअचल को पूर्व में मिले इंदिरा आवास नदी में बह गए।
बंधे पर रह रहे ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन इनका हाल लेने वाला कोई नहीं है। पीड़ितों का आरोप है कि नेता से लेकर अधिकारी तक आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं लेकिन इस समस्या का कोई स्थायी हल नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे हम लोग प्रति वर्ष बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर रहते हैं। आरोप है कि अधिकारी ही नहीं चाहते है कि इस समस्या का कोई स्थायी हल निकाला जा सके। बाढ़ के नाम पर करोड़ों का बजट प्रति वर्ष मिलता है, फिर भी हम लोग समस्याओं जूझ रहे हैं।
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बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन गंभीर हैं। जिन पीड़ितों के मकान और फसलें नदी की धारा में बह गए हैं, इसका आंकलन कराया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को यथा संभव मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाता है। इसके साथ ही समय पर राहत सामग्री का वितरण भी कराया जा रहा है।
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- संदीप कुमार गुप्ता, अपर जिलाधिकारी
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