बाराबंकी। व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की भारी किल्लत ने खान-पान के कारोबार की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि चाय-नाश्ते के ठेलों से लेकर बड़े रेस्तरां तक अब अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रहे हैं। आपूर्ति बाधित होने के कारण जिले के करीब 20 से 30 प्रतिशत होटल और ढाबे बंद होने की कगार पर हैं। गैस के अभाव में शहर की स्वाद गलियों में सन्नाटा पसरने लगा है और कारोबारी अब कोयले व लकड़ी के पारंपरिक साधनों पर लौटने को मजबूर हैं।
गैस संकट का सबसे भयावह असर सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाले छोटे दुकानदारों पर पड़ा है। शहर के मुख्य चौराहों और रेलवे स्टेशन मार्ग पर छोला-पूरी, समोसा और चाय बेचने वाले दर्जनों ठेले गायब हो चुके हैं। रामसनेहीघाट क्षेत्र के थोरथिया चौराहे जैसे व्यस्त इलाकों में भी कई छोटे होटल बंद हो गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि गैस के बिना काम करना असंभव हो गया है, क्योंकि वैकल्पिक साधनों से लागत बढ़ रही है और ग्राहक को समय पर सेवा देना मुश्किल हो रहा है।