बाराबंकी। बदलते मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है। बारिश के बाद हुए जलभराव से मच्छरजनित बीमारियां तेजी से पांव पसारने लगी हैं। ऐसे में सीएचसी ही नहीं जिला अस्पताल भी इन रोगों से निपटने के लिए तैयार नहीं है। किसी भी अस्पताल में न तो डेंगू वार्ड बनाया गया है और न ही इस रोग से पीड़ित मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में यदि डेंगू ने पैर पसारे तो मरीजों को निजी अस्पताल की ओर रुख करना मजबूरी होगी।
पिछले साल डेंगू से करीब 70 से ज्यादा मौतें हुई थीं। इस रोग को लेकर लोगों में दहशत इस कदर हो गई थी कि मामूली बुखार पर भी लोग डेंगू की जांच कराने लगे थे। पैथोलॉजी चलाने वालों की चांदी हो गई थी और जांच के नाम पर मनमाना दाम वसूलने लगे थे। स्वास्थ्य विभाग इस साल भी इन सबसे सबक नहीं ले रहा है। डेंगू को लेकर अभी तक तैयारियां शुरू नहीं की हैं।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान भी कागजों पर चल रहा है। कहीं पर भी आशा और स्वास्थ्यकर्मी लोगों को जागरूक करते नजर नहीं आ रहे हैं। मोहल्लों में जगह-जगह जलभराव से लार्वा के पैदा होने की आशंका बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक कहीं पर भी डेंगू से निपटने के इंतजाम नहीं किए गए हैं। जिला अस्पताल में अभी तक वार्ड आरक्षित नहीं किया गया है। न ही सीएचसी में ऐसे मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा का कहना है कि जिला अस्पताल में आठ बेड का डेंगू वार्ड बनाया जा रहा है।
दावा, प्लेटलेट्स के लिए नहीं पड़ेगा भटकना
डेंगू से पीड़ित मरीजों के लिए यह राहत भरी खबर है। डीएम सत्येंद्र कुमार के अथक प्रयासों के बाद जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू हो गई है। डेंगू से पीड़ित मरीजों को अब प्लेटलेट्स के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। जिला अस्पताल की पैथाेलॉजी से आसानी से मिल सकेगा।
बनाया जाएगा अलग वार्ड
जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए आठ बेड का एक वार्ड बनाया जाएगा। इसके अलावा सभी सीएचसी में कम से कम दो बेड डेंगू के मरीजाें के लिए आरक्षित रहेंगे। इसको लेकर सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देश जारी किए गए हैं। अस्पतालों में सभी प्रकार की पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं।
- डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ