बाराबंकी। यदि आप उल्टी-दस्त से परेशान हैं तो जिला अस्पताल में आपका इलाज संभव नहीं हैं। शुगर या ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो भी दवा मिलना मुश्किल है। टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना है तो पहले मेडिकल स्टोर से खरीदिए तब जिला अस्पताल पहुंचिए। कुत्ता काटने का बाद लगने वाला इंजेक्शन भी अस्पताल में नहीं है। हालात इतने खराब हैं कि जिला अस्पताल में दर्द की दवा भी गायब है।
जी हां, रफी अहमद किदवई स्मारक जिला अस्पताल में आजकल कुछ ऐसे ही हालात हैं। जरूरी दवाओं की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। डॉक्टर मजबूरी में बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 1000 से अधिक जबकि इमरजेंसी में 300 से 400 मरीज पहुंचते हैं। प्रतिदिन करीब डेढ़ हजार मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन बीते करीब दो सप्ताह से जिला अस्पताल में दवाओं का भारी टोटा है।
इस समय जिला अस्पताल में दवा नहीं होने से मेडिकल स्टोर्स की चांदी हो गई है। मंगलवार को जिला अस्पताल में मिले लखपेड़ाबाग निवासी संतोष शुक्ला ने बताया कि दर्द व उल्टी की दवा नहीं होने से उन्होंने मजबूरी में बाहर से खरीदी। असंद्रा के मनोज गुप्ता ने बताया कि एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आये थे मगर नहीं लग सका। जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट पीके श्रीवास्तव ने भी स्वीकार किया कि दवाओं की कमी है।
15 प्रकार की दवाएं नदारद
जिला अस्पताल से रेनिटिडिन इंजेक्शन, एंटी रैबीज वैक्सीन, मेटफोर्मिन, पेरिनोर्म, ट्रामाडोल इंजेक्शन, डॉयजीन, ओमेज, टिटबैट इंजेक्शन समेत करीब 15 प्रकार की दवाएं जिला अस्पताल में नहीं है। ट्रामाडोल न होने से मरीज दर्द से छटपटाते रह जाते हैं। ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने वाली दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है। जो दवा हैं भी वह काफी कम मात्रा में हैं।
डिमांड पेंडिंग, विशेष सचिव को भी है जानकारी
जिला अस्पताल में दवाओं की भारी कमी होने के बारे में जब यहां के सीएमएस डॉ. ब्रजेश कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दवाओं की सप्लाई उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले जिला अस्पताल के निरीक्षण पर आए विशेष सचिव स्वास्थ्य मन्नान अख्तर को भी पूरे हालात से अवगत करा चुके हैं। डिमांड भेजी जा चुकी है। सीएमएस ने बताया कि अस्पताल स्तर से दवाओं की खरीद नहीं हो पा रही है क्योंकि मार्च से बजट ही नहीं मिला है।