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जिला अस्पताल में ठेले पर हो रहा इलाज

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बाराबंकी। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ठेले और जर्जर स्ट्रेचर पर मरीजों का होता इलाज। - फोटो : BARABANKI
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बाराबंकी। भले ही कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं पर लाखों-करोड़ों रुपये सरकार खर्च कर रही हो। लेकिन शहर में डेढ़ सौ बेड वाले जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों के लिए एक अदद अच्छा स्ट्रेचर तक नहीं मुहैया नहीं है। यहां जुगाड़ के दम पर सब्जी वाले ठेले को स्ट्रेचर का रूप देकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जो दो-चार स्ट्रेचर हैं भी उनमें किसी में जंग तो कोई जर्जर हालत में है। ऐसे में चोटिल मरीजों के संक्रमित (सेप्टिक) होने का भी खतरा मंडरा रहा है।
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ऑक्सीजन प्लांट लगने से लेकर कोविड टीकाकरण केंद्र बने इस जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाएं हाशिए पर दिख रही हैं। बुधवार को जब यहां की स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल की गई तो इमरजेंसी में ही बदहाली की भयावह तस्वीर दिखाई दी। ऐसे में कोविड-19 की तीसरी लहर में स्वास्थ्य महकमा कैसे निपटेगा यह एक बड़ा सवाल है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दोपहर के वक्त करीब आधा दर्जन मरीजों को गैलरी में ही कुछ ठेले और जंग लगे जर्जर स्ट्रेचर पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। इन मरीजों को न तो इलाज के लिए वार्ड में बेड नसीब हुआ और न ही गर्मी से राहत पाने के लिए पंखे ही चलते मिले। बताया गया कि वार्ड में बेड फुल होने के कारण ऐसा किया जा रहा है।
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गैलरी में जहांगीराबाद से आई मरीज रजनी ने बताया कि उसके सीने में दर्द के साथ उल्टियां आदि की दिक्कत हो रही है। वहीं देवकलिया से आई मालती, गदिया से आए शत्रोहन और दादरा से आईं मनोकामिनी ने बताया कि उन्हें बुुखार, सिरदर्द, उलझन आदि के साथ सांस लेने में परेशानी है। अब ऐसे में जिला अस्पताल प्रशासन कोविड की तीसरी लहर पर कैसे विजय पाएगा जब यहां की इमरजेंसी में ही स्वास्थ्य सेवाएं इतनी बदहाल दिख रही हैं।
वार्ड में भी उमस व गर्मी में परेशान दिखे मरीज व तीमारदार
इस भीषण गर्मी में जिला अस्पताल में बिजली की भी उपलब्धता नहीं दिखी। अस्पताल के वार्ड में देखा गया तो वहां पर बेड तो कुछ अच्छी गुणवत्ता के दिखाई दिए मगर छतों पर लगे पंखों की रफ्तार सुस्त होने से मरीज और उनके तीमारदार उमस और गर्मी से बेहाल दिखे।
बताया कि बुधवार को दिन में लो-वोल्टेज के चलते पंखे ठीक से नहीं चले जिससे उनको परेशानी झेलनी पड़ी। कुछ बेड पर तो मरीजों के साथ आए तीमारदारों को दफ्ती व हाथ वाले पंखे का सहारा लेना पड़ा। यह विडम्बना ही है कि यहां के चिकित्सकों के कक्ष में भले ही एसी, कूलर और पंखे चल रहे हो लेकिन वाड में भर्ती मरीजों के कुछ तीमारदार अपने मरीजों के लिए घर से स्टैंडिंग वाला बिजली का पंखा लाने तक को मजबूर दिखे।
यह हाल तब है जब जिला चिकित्सालय में अलग से बिजली विभाग द्वारा फीडर बनाया गया। जो सीधे चंदौली पावर हाउस से जुुड़ा है। इसके बाद भी बिजली की किल्लत से यहां भर्ती मरीज और उनके तीमारदार परेशान दिखाई दिए।
इधर मरीजों की संख्या में अधिक इजाफा हुआ है। इसके चलते जिला अस्पताल के बेड फुल हैं। ऐसे में स्ट्रेचर पर ग्लूकोज लगा दिया गया होगा। बेड खाली होने पर मरीजों को शिफ्ट कर दिया जाता है। अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी नहीं है।
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-एसके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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