फिजाओं में उड़ता अबीर, गुलाल और फाग व होली के गीतों के धमाल ने शहर से लेकर गांव तक रंग जमाना शुरू कर दिया। शहर से गांव तक फगुआ बयार ऐसी चली कि होली की मस्ती छा गई। बुधवार से ही हर तरफ होली की धूम रही और बच्चों ने खूब धमाल मचाया। आज बिरज में होली मोरे रसिया..., होली खेलत रघुबीरा अवध में.., होलिया में उड़े रे गुलाल...आदि गीतों के बीच चारों ओर होली की धूम मची हुई है।
बुधवार का दिन महिलाओं के लिए बहुत व्यस्तता भरा रहा। घर के अन्य कार्यो के साथ ही पूरे दिन गुझिया, पापड़, चिप्स, नमकीन बनाने मेें व्यस्त रहे। खासकर सास बहुएं बातचीत करते हुए गुझिया आदि बनाने में तल्लीन रहीं। बच्चे रंग की चर्चा करने व पिचकारी एक दूसरे को दिखाने में मशगूल रहे।
7.13 बजे के बाद होलिका दहन शुभ
तीन चीजों का एक साथ होना शुभ होता है, पूर्णिमा तिथि, प्रदोष काल और भद्रा न हो। इस साल होलिका दहन में तीनों संयोग बन रहे हैं। शाम 7.13 बजे के बाद होलिका दहन शुभ है। धूप, दीप, कपूर, मिष्ठान आदि के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा अर्चना करनी चाहिए। और होलिका की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए। होलिका दहन के बाद से ही रंगोत्सव शुरू हो जाएगा।
- प्रमोद पाठक, ज्योतिषाचार्य एवं मानस मर्मज्ञ