सरकार की एक योजना जो नौनिहालों के चेहरों पर मुस्कान ही नहीं बन रही बल्कि उनके जीवन को आसान बना रही है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 0 से 19 साल के जिले के 28 बच्चों की सर्जरी कर किसी के कटे होठ सीये, किसी के दिल के छेद की सर्जरी हुई तो कइयों के हाथ पैर को एकदम फिट बना दिया गया। या यूं कहें कि निशुल्क सफल सर्जरी कर डॉक्टरों ने साबित कर दिया कि वह नौनिहालों के लिए धरती के भगवान साबित हुए।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नौनिहालों के इलाज और सर्जरी का खर्च स्वास्थ्य विभाग उठाता है। योजना के तहत ब्लॉक स्तर पर आयुष चिकित्सक, स्टाफ नर्स व एक फार्मासिस्ट तीन सदस्यों की दो-दो टीमें गठित हैं जो साल में दो बार आंगनबाड़ी केंद्रों व एक बार परिषदीय स्कूलों में भ्रमण करती हैं। ऐसे बच्चों की स्क्रीन टेस्ट करने के बाद उन्हें निकटम सीएचसी पर, उसके बाद जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। यहां पर भी इलाज संभव न होने पर डीईआईसी (डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेशन सेंटर) के मैनेेजर ऐसे बच्चों को केजीएमयू ले जाकर सर्जरी कराते हैं।
इन बच्चों को मिली नई जिंदगी
दिल में छेद होने पर सूरतगंज के धर्मेंद्र, रामसनेहीघाट की नीलम सिंह, सिद्घौर की संध्या व फतेहपुर के विनीत के दिल की सर्जरी कराई गई जिसमें करीब 25 लाख रुपये खर्च हुए। वहीं रीढ़ पर फोड़े होने पर हरख के ओमकार, हैदरगढ की अल्फिया बानो, हाथ पैर मुड़े होने पर राज, शौर्य, आशुतोष, रोशनी, तौहीद, सुमन व रामबाबू का आपरेशन किया गया। वहीं लक्ष्मी, रंजना, सीवांशी, महफूज, अरीबा, रोहित, नैतिक, आलोक, अनिविपत, जीशान, मोहन, जोगेंद्र आदि के कटे होठ व ताले सीये गए हैं। अब इन बच्चों की जिंदगी आसान हो गई। डीईआईसी अधिकारी डॉ. अवधेश सिंह बताते हैं कि जिन गर्भवती महिलाओं में आयरन और फोलिक एसिड की कमी होती है वह एनेमिक हो जाती हैं।