बाराबंकी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को पद्मश्री राम सरन वर्मा को सम्मानित किया। यह सम्मान लखनऊ आकाशवाणी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रतीक चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर खेती के विकास में उनके योगदान को सराहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईस्कूल फेल होने के बावजूद राम सरन वर्मा कृषि वैज्ञानिकों से भी आगे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह स्वयं उनके खेत में खेती के आधुनिक तरीके सीखने गए थे। तीन माह पहले 16 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री राम सरन वर्मा के दौलतपुर स्थित खेत पर आए थे। यह दौरा ''खेती की बात खेत पर'' नामक विशेष कार्यक्रम के तहत आयोजित हुआ था। उस समय मुख्यमंत्री ने राम सरन के केला, टमाटर और आलू के खेतों का बारीकी से निरीक्षण किया था। वह राम सरन के अभिनव खेती के तरीकों से बहुत प्रभावित हुए थे। मुख्यमंत्री जब से राम सरन के खेत में आए हैं, तब से वह जहां भी उन्हें देखते हैं, उनके बारे में चर्चा अवश्य करते हैं।
राम सरन वर्मा की नवीन कृषि विधियां-
बाराबंकी में हरख ब्लॉक के दौलतपुर गांव में जन्मे राम सरन वर्मा अपने खेतों में टिश्यू कल्चर विधि से केला उगाते हैं। वह सराहा विधि का उपयोग करके टमाटर की खेती करते हैं। आलू की बोवाई के लिए वह 56 इंच का ऊंचा बेड बनाकर दो लाइनों में एक साथ बीज बोते हैं। उन्होंने अपने खेत में खाद, बीज और अन्य कृषि संबंधी जानकारी लिखकर प्रदर्शित की है। खेती सीखने आने वाले किसानों को भी वह यह नवीनतम और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री का प्रोत्साहन और सम्मान-
राम सरन वर्मा को वर्ष 2019 में टिश्यू कल्चर केला खेती में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से नवाजा गया था। मुख्यमंत्री उनके कृषि नवाचार और किसानों को प्रेरित करने के प्रयासों से विशेष रूप से खुश हैं। उनका यह कार्य अन्य किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों को राज्य के कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।