फतेहपुर क्षेत्र में खेत में भीगे पड़े आलू के ढेर के पास बैठा किसान
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जिले में शुक्रवार की सुबह हुई बारिश और ओलों ने किसानों की नींद उड़ा दी। तीन सालों से प्रकृति की मार झेल रहे किसानों की दलहनी, तिलहनी फसलों के अलावा आलू व पोस्ता की फसल को 25 से 40 प्रतिशत तक क्षति हुई है। गेहूं को कहीं फायदा तो कही तेज हवाओं के चलते दस फीसदी तक नुकसान होने का अनुमान है। जहांगीराबाद से रानीबाजार व रामनगर बेल्ट में बारिश के साथ ओले भी गिरे। कुल मिलाकर शुक्रवार का दिन किसानों पर भारी पड़ा। जबकि सरकारी तंत्र किसानों के नुकसान को अनुमानत: 25 फीसदी तक ही नुकसान होने की बात बता रहा है।
आलू व पोस्ता को भी नुकसान
बारिश व ओला से पोस्ता व आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। अभी तक भंडारित नहीं हो सके आलू भीगने से सड़ने के आसार बढ़ गया है। पोस्ता किसानों को भी बारिश व ओला से चालीस फीसद तक नुकसान होने की उम्मीद है।
गंगौली गांव निवासी किसान परशुराम भी बारिश से परेशाहैं। बताया की सरसों व गेहूं की फसल गिर जाने से किसानों को काफी नुकसान होगा। लागत निकल आए यही काफी है। तेलवाय गांव निवासी गुरु प्रसाद भी फसलों के गिर जाने से परेशान हैं। यह कहते हैं कि गेहूं व सरसों की फसल गिर गई है। खेत में पड़ी फसल दबी रह गई तो इसके सड़ने की उम्मीद है। खेतों में लगे आलू के भी सड़ने की उम्मीद है।
जिन किसानों ने एक दो दिन पहले गेहूं में पानी लगाया था उस खेत में फसल गिरी है। इससे दाने प्रभावित होगा। गेहूं की जो फसल फ्लावरिंग स्टेज में हैं उसमें भी दस फीसद तक नुकसान का अनुमान है। दलहन में अरहर, चना, मटर, मसूर की फसल जो प्लावरिंग स्टेज में हैं बारिश व तेज हवाओं के चलते इनके फूल गिर जाएंगे।
इससे 15 से 25 फीसद तक नुकसान होने की उम्मीद है। दलहनी फसलों में फलीभेदक कीड़ों के प्रकोप से नुकसान हो सकता है। बोई गई जायद की फसल उरद, मूंग के खेत में नमी अधिक होने पर इन्हें नुकसान होगा। -डॉ. जेपी सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र हैदरगढ़