बाराबंकी। जिला अस्पताल आने वाले मरीज फार्मेसी से दवा लेने के बाद एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां की फार्मेसी पर दवा बांटने वाले ट्रेनी फार्मासिस्ट इतनी जल्दबाजी में रहते हैं कि वह पेट की जगह पर हार्ट और बुखार की जगह पर सांस की दवाएं दे देते हैं। ऐसे में इलाज कराने आए मरीज की तबियत सुधरने की बजाय बिगड़ भी सकती है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। इसकी वजह से डॉक्टर और अन्य स्टाफ जल्दी-जल्दी मरीजों को देखकर खानापूर्ति करते नजर आए। हालांकि ऐसे हालात अस्पताल में अक्सर बने रहते हैं। लेकिन हद तो तब हो गई, जब पेट संबंधी बीमारी का इलाज कराने आए एक मरीज को फार्मेसी से हार्ट की दवा दे दी गई। दवा का प्रयोग किस प्रकार होेना है यह जानने के लिए जब मरीज डॉक्टर के पास पहुंचा, तब पर्चा देखकर डॉक्टर ने उसे बताया कि पेट की जगह हार्ट की दवा दे दी गई है। इसके बाद डॉक्टर ने दवा बदलने के लिए फिर से मरीज को फार्मेसी भेजा।
इस मामले से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना डॉक्टर को दिखाए दवा ले आना खतरे से खाली नहीं है। अस्पताल की फार्मेसी पर दवा देने वाले अधिकांश ट्रेनी फार्मासिस्ट हैं। ऐसे में कई बार उनसे इस प्रकार की चूक हो जाती है। वहीं अनुभवी फार्मासिस्ट सिर्फ फार्मेसी कक्ष में पड़ी कुर्सियों पर बैठकर ही अपनी ड्यूटी पूरी कर लेते हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा का कहना है कि औषधि वितरण कक्ष में अनुभवी फार्मासिस्टों की तैनाती है, जिनकी देखरेख में दवाओं का वितरण कराया जाता है।