नदी का पानी उफान मारने लगा है। विद्यालयों से लेकर सरकारी अस्पतालों में भी नदी का पानी भर जाने से यहां पर आने वाले मरीजों का उपचार करने में चिकित्सकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग को दावा है कि सभी बाढ़ चौकियों पर चिकित्सकों की तैनाती कर दी गई है। विभाग बाढ़ पीड़ितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराए जाने का दावा भी कर रहा है।
घाघरा नदी का पानी खतरे का निशान पार करने जाने के बाद तराई के करीब दो दर्जन से अधिक गांव नदी के पानी की चपेट में आ गए हैं। यहां के लोग एलिग्न चरसरी तटबंध, अलीनगर रानीमऊ तटबंध और हेतमापुर तटबंध पर परिवारीजनों के साथ शरण लिए हुए हैं।
नदी का पानी तराई क्षेत्र में बने प्राथमिक विद्यालयों के साथ ही उप स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच गया है। टिकैतनगर क्षेत्र का उप स्वास्थ्य केंद्र गोबरहा नदी के पानी की चपेट में आ गया है। नदी का पानी अस्पताल में भर गया है।
जिससे यहां पर आने वाले मरीजों के साथ ही चिकित्सकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां आने वाले मरीजों को उपचार के लिए टिकैतनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सहारा लेना पड़ रहा है।
जबकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि तराई में जितनी भी बाढ़ चौकियां खुली हैं उन पर चिकित्सकों और कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। इन चौकियों पर पर्याप्त मात्रा में दवाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं।