हैदरगढ़ (बाराबंकी)। दर्जा डिपो का..., बेड़े में करीब 55 बसें, मगर न कर्मचारी न सुविधाएं। एक कर्मचारी रोज कुछ घंटों के लिए आता है और किसी तरह ड्यूटी पूरा करके चला जाता है। हालात यह हैं कि अगर अन्य डिपो की बसें यहां न आए तो डिपो में ताला लग जाय। जिले में हैदरगढ़ डिपो कुछ इसी तरह से संचालित हो रहा है। इस डिपो की बसें प्रदेश के अन्य जिलों मेें दौड़ रही हैं, मगर यहां पर नहीं आती।
मौजूदा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने करीब 20 साल पहले मुख्यमंत्री रहते हुए हैदरगढ़ में डिपो की स्वीकृति की थी। इससे लोगों की उम्मीदें बढ़ गई थी। गत दिनों में पौने तीन करोड़ रुपये की लागत से डिपो का भवन भी बनकर तैयार हो गया है। मौजूदा समय में डिपो के बेड़े में 55 बसें हैं, मगर हैदरगढ़ डिपो का संचालन लखनऊ उपनगरीय डिपो से हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि हैदरगढ़ डिपो की बसें प्रदेश के अन्य शहरों व जिलों में दौड़ रही हैं, मगर हैदरगढ़ में ही नहीं आती। एआरएम तक यहां नहीं बैठते।
डिपो की बसों से रोजाना करीब 10 लाख की आय होती है। बस एक मात्र बस दिल्ली के लिए सवारियां लेने बस स्टॉप पर पहुंचती है। अगर बाराबंकी समेत अन्य डिपो की कुछ बसें यहां न रुके तो डिपो में ताला बंद करना पड़ेगा। हैदरगढ़ डिपो/ बस स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव है। बस कुछ कंक्रीट की बेंच बनी हैं। यात्रियों व चालक परिचालक के बैठने के लिए बेंच व कुर्सियां नहीं है।
वाटर कूलर व आरओ नहीं होने से शुद्ध पानी नहीं मिलता है। बाराबंकी डिपो की करीब बीस बसें तथा लखनऊ उपनगरीय डिपो की कुछ बसें दिन में हैदरगढ़ स्टेशन से आवागमन करती हैं। एआरएम हैदरगढ़ डिपो काशी प्रसाद ने बताया कि हैदरगढ़ बस स्टेशन पर फर्नीचर की व्यवस्था जल्द की जाएगी। उद्घाटन होने पर अन्य कर्मचारी व सुविधाएं बढ़ेगी।
पांच बजे के बाद लखनऊ नहीं जाती कोई बस
हैदरगढ़ से दरियाबाद, टिकैतनगर, भिटरिया, अयोध्या महराजगंज, रायबरेली, शिवगढ़, बछरावां, लालगंज, शुकुलबाजार, बाबा बाजार, रुदौली, गौरीगंज आदि के लिए रोजाना हजारों यात्री भटकते हैं। हैदरगढ़ बस स्टेशन से शाम पांच के बाद लखनऊ तथा शाम साढ़े सात बजे के बाद बाराबंकी के लिए कोई साधन नहीं है। 24 घंटा यात्री लखनऊ सुल्तानपुर चौराहे पर बस का इंतजार करते हैं।
-