बाराबंकी। ब्रह्माकुमारी संस्था की दूसरी मुख्य प्रशासिका रहीं दादी प्रकाशमणि की 16वीं पुण्य स्मृति दिवस पर दिव्य शक्ति भवन में श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। दादी ने अपने जीवनकाल में सभी को परमपिता परमात्मा के अवतरण का दिव्य संदेश देते हुए सबमें निस्वार्थ आत्मिक स्नेह का दिव्य संचार किया।
शाखा की संचालिका बीके अनुराधा बहन एवं बीके प्रीति बहन ने कहा कि दादी जी संपूर्ण विश्व में ज्ञान व प्रकाश फैलाने वाली एक ऐसी मणि थीं, जिनका जन्म एक सितंबर 1922 में सिंध हैदराबाद के एक सिंधी परिवार में हुआ। निमित्त निर्माण और निर्मल वाणी जैसी विशेषताओं से शृंगारित दादी जी ने मात्र 14 वर्ष की आयु में स्वयं को ईश्वरीय सेवाओं के लिए समर्पित कर दिया।
1969 से 2007 तक संस्था की मुख्य प्रशासिका के पद पर रहकर निराकार शिव ने प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की ओर से जो नन्हा पौधा रोपित किया था, उसे विशाल वट वृक्ष का रूप दिया। नम्र बनो सब नमन करेंगे ऐसे ओजस्वी वक्तव्य से दादी जी सभी को परमात्मा प्यार एवं शिक्षाएं देती थीं। दादी जी के स्मृति दिवस को विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। दादी नारी शक्ति को जागृत करने तथा नारी सशक्तिकरण की एक अद्भुत मिसाल थीं। इस अवसर पर सभी ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए दादी जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज में एकता, भाईचारे, प्रेम एवं सौहार्द को बढ़ाने का संकल्प किया। अंत में सभी ने भोजन प्रसाद भी ग्रहण किया।