बाराबंकी। रोडवेज की बसों में यात्रियों की सुरक्षा और संचालन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) की व्यवस्था जिले में पूरी तरह दुरुस्त नहीं दिख रही है। जिले में संचालित कई अनुबंधित बसों में जीपीएस उपकरण सक्रिय नहीं होने से बसों की रियल टाइम मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग प्रभावित हो रही है। ऐसे में बसों की लोकेशन, निर्धारित रूट पर संचालन और समयबद्धता की निगरानी करना परिवहन विभाग के लिए चुनौती बना है।
बाराबंकी डिपो से वर्तमान में 57 रूटों पर कुल 116 बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें 97 अनुबंधित बसें, चार डबल डेकर बसें तथा 15 परिवहन निगम की नियमित बसें शामिल हैं। सबसे अधिक संख्या अनुबंधित बसों की होने के कारण इनके संचालन की निगरानी जीपीएस प्रणाली पर ही निर्भर है। बीते माह निरीक्षण के दौरान छह अनुबंधित बसों में जीपीएस सक्रिय नहीं मिला था। परिवहन विभाग का दावा है कि सभी अनुबंधित बसों में जीपीएस अनिवार्य रूप से लगाया गया है और इसे सक्रिय रखना भी अनुबंध की शर्तों में शामिल है।
एआरएम संजीव कुमार ने बताया कि जिन बसों में जीपीएस सक्रिय नहीं होता है, उनका संचालन नहीं कराया जाता है। पूर्व में जिन अनुबंधित बसों में जीपीएस सक्रिय नहीं मिला था, उनके संचालकों को नोटिस जारी किया गया था। फिर भी पूरे मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी।
जीपीएम से होती है ऑनलाइन निगरानी
जीपीएस प्रणाली के माध्यम से बसों की लोकेशन, गति, रूट, निर्धारित समय और संचालन की ऑनलाइन निगरानी की जाती है। किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना अथवा यात्रियों की शिकायत मिलने पर संबंधित बस की जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में जीपीएस निष्क्रिय रहने से यात्रियों की सुरक्षा और विभागीय निगरानी दोनों प्रभावित होती हैं।