बाराबंकी। देवा रोड स्थित बस स्टेशन से प्रतिदिन करीब 94 अनुबंधित बसें विभिन्न रूटों पर संचालित की जाती हैं। देखभाल व मरम्मत इत्यादि न होने से इनमें से कई बसों की हालत इतनी खस्ताहाल व जर्जर हो चुकी कि इनमें सफर करना खतरे को चुनौती देने से कम नहीं लगता। इन बसों के टूटे शीशे, लटकते तार, उखड़ी रबर, टूटी ग्रिल और बदहाल फर्स्ट एड बॉक्स सफर के समय यात्रियों की जान सांसत में डाले रखता है। शिकायत के बाद भी यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रोडवेज के जिम्मेदार उदासीन बने हैं।
बस संख्या यूपी 41 एटी 3811 में कंडक्टर सीट के पास वायरिंग के तार बेतरतीब तार लटक कर झूलते दिखे। इससे कभी भी शॉर्ट सर्किट या दुर्घटना की आशंका हो सकती है। इसी तरह बस संख्या यूपी 41 एटी 7985 में खिड़की के पास लगी लोहे की सुरक्षा ग्रिल टूटी दिखी। यह ग्रिल सुरक्षा के लिए लगाई जाती है।
कई बसों की खिड़कियों के शीशे खराब होकर या तो जाम हो गए हैं अथवा टूटे हुए हैं। ऐसे में बरसात के दौरान यात्रा करते समय बारिश का पानी बसों के अंदर आने से यात्रियों को भीगते हुए यात्रा के लिए विवश होना पड़ता है। इस संबंध में एआरएम जमीला खातून का कहना है कि सभी अनुबंधित बसों को समय-समय पर निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, यदि कोई बस मानक के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उस पर कार्रवाई तय होगी।
कैसरबाग डिपो तक बस सेवा की मांग
हैदरगढ़ (बाराबंकी)। हैदरगढ़ से लखनऊ के लिए कैसरबाग डिपो तक की बस सेवा बीते डेढ़ साल से बंद है। इससे दैनिक तौर पर लखनऊ तक आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठाना पड़ रही है। एमएसटी धारी यात्रियों ने रोडवेज प्रबंधन से बंद बस सेवा को फिर से बहाल किए जाने की मांग की है। यात्रियों को कहना है कि बाराबंकी से बड़ी संख्या में विद्यार्थी, कारोबारी व नौकरीपेशा सुबह लखनऊ के लिए निकलते हैं। डिपो पर बस की सुविधा न होने से उन्हें लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर मुख्य चौराहे से आलमबाग व चारबाग डिपो की बस पकड़ने को विवश होना पड़ता है।