श्रद्धा से पटे नदी के घाट व तालाबों पर शाम के साढ़े चार बजते ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं की रेठ नदी के चिलहटा व आलापुर घाट पर गुरुवार की शाम चार बजे से ही श्रंगार से भरे बांस व पीतल के कुलसुप लेकर चिलहटा घाट व विभिन्न तालाबों पर पहुंच गई। शाम होते ही महिलाओं ने नदी में स्नान कर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया और सिप-सोप्ता पर पूजा अर्चना कर भगवान सूर्य के सामने आंचल फैलाकर सुख समृद्धि के लिए आराधना की।
परंपरा के अनुसार बृहस्पतिवार शाम महिलाओं ने सूर्यास्त के समय पहले से बनाए गए सिप-सोप्ता (मिट्टी से बनाया गया मंदिरनुमा गुंबद) की पूजा अर्चना की तथा पांच बार परिक्रमा की। नए कपड़े, सुहाग श्रृंगार कर महिलाओं ने अघरौटा (ठेकुआ) चढ़ाया तथा गन्ना, कच्ची हल्दी गागरा, सुथनी आदि पूजा के लिए एकत्र किए सामान से पूजा अर्चना की।
इसके बाद पानी में उतर कर महिलाओं ने दीपकों की कतार जल मेें प्रवाहित की और माथे पर पीले सिंदूर का तिलक सजाकर आंचल फैलाकर सूर्यदेव से परिवार की खुशहाली की दुआ मांगी। बृहस्पतिवार शाम बड़ी संख्या मेें महिलाएं व पुरुष बहंगी में बांस की सूपेली, सूप, गागरा, सुथनी, कच्ची अदरख, गाजर, शकरकंद, आंवला, कैथा, कमरान, पनियाला, गंगाजल, दूध, फूल आदि पूजन सामग्री लेकर नदी व तालाब किनारे पहुंचे।
रेठ नदी के चिलहटा घाट, आलापुर घाट व नागेश्वरनाथ मंदिर परिसर स्थित तालाब पर पूजा अर्चना की। छठ पूजा को लेकर चिलहटा घाट, आलापुर घाट, नागेश्वरनाथ मंदिर स्थित तालाब, पीएसी बटालियन स्थित तालाब समेत कई तालाबों पर व्रती महिलाओं की अधिक भीड़ रही। पुरुषों ने भी पूजा में सहयोग किया। पूजा अर्चना के बाद महिलाओं के साथ आए बच्चों व बड़ों ने सिर पर कलसूप का पाटा रख कर घर तक पहुंचाया।
फिर निर्जला व्रत धारण किए महिलाओं ने घर के आंगन में चौक (रंगोली) सजाकर पूजा की और छठ मइया के गीत- हे छठ मैया पूरी करो हमार अरजिया.., रथवा पर सवार, अर्घ्य लेवे आहिल बाड़े हो..., का चाही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय..., केरवा जे फरेला घवद से ओह पे सुगवा मंडराय.., कातिक मास अइले परब, हम छठ करबो न, पटना से लइबो जोड़ा नारियर, अरघ देबो जरूर... आदि गीत गाए।