चौबीस घंटे के बाद घाघरा नदी ने फिर पलटी मारी है। एल्गिन ब्रिज पर स्थित खतरे का निशान पार कर घाघरा गांव में तबाही मचाना शुरू कर दिया है। तीन गांव पूूरी तरह जलमग्न होने के कारण यहां के निवासियों ने तटबंध पर डेरा जमा लिया है।
बारिश से बाढ़ पीड़ितों की हालत और खराब हो गई है। इससे प्रशासन को राहत कार्य पहुंचाने में भी दिक्कत हो रही है। नावों की कमी होने के कारण अधिकतर लोग किसी तरह पानी में उतर कर निकल रहे हैं। दो सेंटीमीटर प्रतिघंटा से बढ़ रही घाघरा का जलस्तर 106.216 सेमी पर पहुंच गया था। एडीएम ने बताया कि मंगलवार की शाम छह बजे एक लाख 76 हजार 564 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है, इसका असर बुधवार सुबह तक जिले में पड़ेगा।
जिले में घाघरा नदी एक सप्ताह से अधिक समय से तराई इलाके में तबाही मचाना शुरू कर दिया था। नेपाली व बारिश के पानी से घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। दो दिन पहले खतरे का निशान पार करने के बाद जलस्तर थम गया था।
इस दौरान हालात बिगड़ते देख एल्गिन चरसड़ी बांध व इसके निकट बसे रायपुर, परसावल, नैपुरा व इनके मजरों के बाढ़ पीड़ितों का हाल लेने बाढ़ मंत्री, प्रमुख सचिव से लेकर डीएम व बाढ़ से जुड़े अफसर यहां पहुंच चुके हैं। नेपाल से एक लाख 22 क्यूसेक पानी छोड़े जाने व बारिश के कारण सोमवार की शाम घाघरा का जलस्तर फिर बढ़ने लगा था।
मंगलवार की शाम छह बजे खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। एक बार फिर नदी के उस पार बसे गाव के लोग पलायन कर बंधे व तटबंधों पर पहुंच रहे हैं। हालात बिगड़ने लगे हैं पीड़ितों को प्रशासन ने राहत सामग्री उपलब्ध तो कराई है पर उन्हें खाना बनाने व पशुओं के चारे की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित घरों से अपनी गृहस्थी का सामान नावों पर किसी तरह से लेकर के सुरक्षित ठिकानों पर निकलने लगे। रायपुर गांव के देवी दयाल व दृगपाल ने बताया कि पशुओं के चारा व खाना बनाने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
परसावल गांव के समित यादव ने बताया कि आज प्रशासन का कोई अमला हालचाल लेने नहीं आया। जिले के सिरौलीगौसपुर, रामसनेहीघाट, फतेहपुर, रामनगर तहसील के कई गावों में बाढ़ का संकट बढ़ने लगा है।