घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने से तराई बेल्ट के गांवों में हड़कंप मच गया है। लगातार नेपाल से छोड़े जा रहे पानी से घाघरा के किनारे बस कई गांवों को बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रामनगर तहसील के कई गांवों में घाघरा का पानी घुसने लगा है। जिससे ग्रामीण पलायन की तैयारी में जुटे है। घाघरा का जलस्तर बढ़ने से प्रशासनिक अमला भी अलर्ट किया।
सोमवार को घाघरा का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर 106.376 रहा। जो खतरे के निशान से 30 सेंटी ऊपर था। सोमवार को घाघरा एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे के रफ्तार से बढ़ती रही। वहीं लगातार नेपाल से छोड़ा जा रहा पानी सोमवार को भी 1.57 लाख क्यूसेक छोड़ा गया। जिसके बाद घाघरा की तराई में बसे गांव बाढ़ के घिरने लगे है।
पहले से बाढ़ प्रभावित सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के नाउनपुरवा, चरपुरवा, नयापुरवा, बेहटा, रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार, कोयलावर, ढ़ेमा, गुनौली, टिकरी, मल्दहा व गढ़ी आदि गांवों में और अधिक जलभराव हो गया है। इन गांवों में तो एक पखवारे से अधिक समय से पानी भरा है।
ऐसे में बंधे पर गुजारा कर रहे बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं और बढ़ गई है। जलभराव के कारण इन गांवों के लोगों के आवागमन के रास्ते बंद हो गए है। मगर, घाघरा के बढ़ रहे जलस्तर रामनगर तहसील के कंचनापुर, कोरिनपुरवा, जमका व खुज्जी गांवों के किनारे तक पानी पहुंच गया है। बाढ़ का पानी देख ग्रामीण पलायन को लेकर सामान समेटने लगे है।
पिछले दिनों घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से 30 सेंटी ऊपर पहुंचने से जहां कंचनापुर गांव के पास कटान शुरू हो गई थी तो कोठरी गौरिया गांव के पास रानीमऊ-अलीनगर बांध को भी खतरा था जिसके बाद बाढ़ के अधिकारियों ने कटर को मजबूत करने का काम कराया था। इस संबंध में एडीएम अनिल कुमार सिंह का कहना है कि लगातार नेपाल से छोडे़ जा रहे पानी से घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बाढ़ क्षेत्र के एसडीएम को अलर्ट कर दिया गया है। एल्गिन चरसड़ी बांध कटे होने के कारण अधिकांश पानी उधर जाने के कारण रानीमऊ-अलीनगर आदि बांध को कोई खतरा नहीं है।