घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच स्थिर हो गया है। नदी के जलस्तर के स्थिर होने से कटान का खतरा बढ़ गया है। वहीं कचनापुर में स्थित जैसी की तैसी बनी हुई है। नदी का जलस्तर स्थिर होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
घाघरा नदी का पानी एल्गिन ब्रिज पर बने खतरे के निशान 106.076 से ऊपर पहुंच 106.286 पर ठहर गया है। नदी का जलस्तर स्थिर होने से तराई के लोगों के साथ ही प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है, लेकिन नदी कब करवट बदल दे इसको लेकर बाढ़ चौकियों पर तैनात अधिकारी पूरी तरह से सतर्क हैं, लेकिन कटान का खतरा बना हुआ है। यहां के लोगों का कहना है कि नदी का जलस्तर जैसे ही घटना शुरू होगा नदी का पानी कटान शुरू कर देगा। यह कटान किस ओर होगी यह अभी से कह पाना मुश्किल है।
इसको लेकर बाढ़ खंड के अधिकारी सतर्क हो गए हैं। वहीं, कचनापुर में बने प्राथमिक विद्यालय का हाल जैसे का तैसा है, विद्यालय का आधा हिस्सा अभी पानी में डूबा हुआ है। यहां के लोगों का कहना है कि यदि नदी का पानी बढ़ता है तो इससे गांव में बनी मस्जिद को नुकसान हो सकता है। क्योंकि विद्यालय के बाद नदी का पानी मस्जिद को अपनी चपेट में ले सकता है। इसको लेकर गांव के लोग आशंकित हैं।
इस बाबत अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया का कहना है कि घाघरा नदी का पानी रविवार को बढ़ने लगा था और वह खतरे का निशान भी पार कर गया था। लेकिन सोमवार को नदी का पानी स्थिर हो गया है। नदी के पानी पर बराबर नजर रखी जा रही है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।