बारिश के साथ ही क्षेत्र में घाघरा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान भी तेज हो गई है। लगातार पानी बढ़ने से तेलवारी व इटहुआ गांव के ग्रामीणों में दहशत है। घाघरा की कटान में तीन किसानों के 22 बीघे गन्ने के खेत भी समा गए हैं।
गांव के बीस मीटर दूरी तक घाघरा के पहुंचने से ग्रामीण लगातार कटान पर नजर रखे हुए हैं। इन दोनों गांवों की आबादी करीब दो हजार है। गांव के ग्रामीण बेचन लाल, बिसई, गिरधारी ने बताया कि घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि जलस्तर तो बढ़ ही रहा है। साथ ही कटान भी हो रही है। गांव के बिसई, गिरधरी ने बताया कि सोमवार शाम हुई बारिश अगर रात में भी जारी रही तो सुबह तक नदी गांव तक पहुंच जाएगी। ऐसे में ग्रामीणों के लिए खतरा बढ़ जाएगा।
नदी में समा गए गन्ने के खेत
घाघरा नदी का कटान तेज है। कुछ ग्रामीणों के खेत तो इसकी जद में हैं ही। ऐसे ही हालात रहे तो गांवों पर भी खतरा दूर नहीं हैं। गांव के रामराज के 12 बीघा, लाला के 2 व बाबू के 8 बीघा गन्ने के खेत घाघरा की कटान ने लील लिए हैं।
दिन रात हो रही निगरानी
ग्रामीणों ने बताया कि घाघरा के बढ़ रहे कटान से ग्रामीणों में दहशत है। घाघरा पर दिन रात नजर रखी जा रही है। लोग टोलियां बना कर दिन रात जगह-जगह नदी के कटान पर नजर रख रहे हैं।
नायब तहसीलदार ने लिया जायजा
ग्रामीणों ने कहा कि अभी से तेजवारी व इटहुआ गांवों पर घाघरा का खतरा मड़रा रहा है। इसको लेकर ग्रामीण सतर्क हैं। प्रशासन द्वारा अभी तक नाव आदि की भी व्यवस्था नहीं की गई है। सुबह नायब तहसीलदार आए थे लेकिन उनके अलावा अन्य कोई अधिकारी इन गांवों का जायजा लेने तक नहीं आया है।