कोठी (बाराबंकी)। सिद्धौर ब्लॉक के भठिया गांव की गीता देवी ने दोना-पत्तल बनाकर इसे बेचने का काम शुरू किया। समूह से ऋण लेकर शुरू किए गए इस काम से गीता ने कुछ ही समय में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनकर अपनी जिंदगी संवार ली। इससे होने वाली आमदनी से परिवार का खर्च भी काफी आसानी से चलने लगा है।
गीता देवी अपने साथ ही अन्य महिलाओं को भी इस काम से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनाने में मुहिम में भी जुटी हैं। भी काम दे रही हैं। इनके काम की लोग सराहना करते हैं। परिवार का खर्च भी आसानी से चल रहा है। गीता ने हिंदुस्तान महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद एक लाख रुपये का ऋण लेकर दोना-पत्तल बनाने की मशीन खरीदी। काम अच्छा चलने से आमदनी भी बढ़ने लगी।
गीता देवी ने बताया कि वह बचपन से ही कुछ करना चाहती थी, लेकिन पारिवारिक स्थिति अच्छी न होने के कारण सिर्फ इंटरमीडिएट तक ही पढ़ाई कर पाईं। समूह से जुड़ने के बाद स्वरोजगार का प्रशिक्षण मिला तो मानों हसरत पूरी हो गई। बताया कि दोना-पत्तल बनाने की मशीन लगाने के बाद शुरुआती दिनों में कई मुश्किलें आईं। कच्चे माल की व्यवस्था करना, मशीन की सेटिंग, मार्केटिंग और ग्राहकों से संपर्क जैसी चुनौतियों से निबटने में कुछ समय जरूर लगा लेकिन धीरे-धीरे सब बेहतर हो गया।
अब वैवाहिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल करने के लिए लोग सीधे इनके यहां से दोना-पत्तल खरीदने आते हैं। दुकानदार भी एडवांस बुकिंग के साथ दोना-पत्तल खरीदते है। इससे हर माह औसतन आठ हजार रुपये की आमदनी आसानी से हो जाती है। सहालग के दिनों में आमदनी दोगुना तक पहुंच जाती है।